Just Before the Dawn Breaks (Poem)

                    (1) Crickets are conspicuous by their silence, Frogs have long lapsed into inactivity, There is yet time for before the crowing begins, Restive is the monotony of darkness!                      (2) Dawn is yet to break, but I am awake, Bustle of engines fills the emptiness, Some still feel the need to honk at this…

मैं किस भारत से आता हूँ – कुपात्र वीर दास को मेरा जवाब

मैं भारत से आता हूँ । मैं किस भारत से आता हूँ? दुविधा में जीने वाले, बिके हुए, खोखले, नफरती टट्टुओं को दो भारत दीखते हैं । दो, बस दो ! भारत केवल जागे हुए और सुप्त, अमीर-गरीब, राजपरिवार या आम आदमी, कामकाजी और बेरोजगार, हिन्दू-मुस्लिम, पढे लिखे अथवा गवार, रेपिस्ट और भद्र में ही…

I Come From India & I do not bear any Guilt -A Reply to Vir Das’ PeeJs

I come from India. Which India do I come from? There are not just two, but multitudes of them. It is only the binary-minded, the indoctrinated, the compromised, the hateful, the star struck, burdened consciences who believe that there are just two Indias. Every Indian’s India is different, and there are more than a billion…

भीख तो कहना उचित नहीं पर कटी-छटी आज़ादी थी (कविता)

चुक चुके अंग्रेजों को एक दिन तो वापस जाना था,सैंतालीस नहीं तो अड़तालीस में टिकट कटवाना था।2। पढ़ते आए हैं बचपन से विश्व युद्ध की थकान थी भारीजाने वाले स्वतः गए, पर हम हाथ जोड़े रहें आभारी ? (4) आभारी उनके जो मान बैठे हम एक धरा पर दो राष्ट्र हैं,पलट कर हमसे झूठ कह…

The DJOKER V. Meddy Bear – The Tenth Duel @RolexParisMasters

Daniil Medvedev had overpowered Novak Djokovic in the US Open final barely two months back. A dejected Djoker had proceeded on a long break to rejuvenate, and had returned with renewed resolve to finish the Year End as the Number One for a record Seventh time. This target was achieved after a hard-fought semi-final win…

दीपावली पर अवांछित मनन-चिंतन

पूजा के सिंगाड़े कल रात ही निपटा दिये थे । गुलाब जामुन धरे रह गए । जीवन ऐसे ही धरा रह जाता है । आदमी गुलाबजामुन को बचाए रख कर पहले सिंगाड़े चरता है । लक्ष्मी पूजा में ईख का जोड़ा भी रखा था । ईख अभी भी लक्ष्मी के इर्द-गिर्द खड़ी हैं । बचे…

दीप भर नहीं हूँ (कविता)

दीप भर नहीं हूँ केवल ज्योत हूँ मैं धर्म की प्रकाश में ही निहित मेरे सनातन का मर्म भी   (4) प्रज्ज्वलित हूँ आदि से   मैं पूर्वजों की संपदा प्रयास कर न बुझा सका मुझे कोई भी आक्रांता (8) अपनी ही धरा पर युगों से संघर्षरत   कोटि-कोटि आहुतियों से जीवन ये सिंचित रहा…

Hello Mr. Virat Kohli, How Much is Your Carbon Footprint?

I am a big fan of Virat Kohli. Not particularly of his cricketing skills or his attitude though, but of his eagerness to play a social activist. If he plays his game the right way, he might end up as India’s Thunberg, although Tendulkar’s peak level and popularity might still elude him. Then again, Woko…

“I have got AFGHAN BLOOD. There is nothing to be Scared of.”

If the blood flowing in your veins were Indian, and not Afghan, what then? Would it have made any difference? Pronouncements such as the above are symptomatic of false pride, racial arrogance and misplaced sense of superiority of some communities in India, vis-à-vis the others. I would put “ye Rajpoot khoon hai….” and “Jat ka…

पाकिस्तानी क्रिकेटरों की साफ़गोई का कायल होता जा रहा हूँ (व्यंग्य)

विश्व कप में बारह बार हारने के बाद पाकिस्तान को अंततः भारत पर जीत नसीब हुई । छियान्वे से हरे वकार युनूस के घावों पर अब जाकर कुछ मलहम लगा । कसम से जडेजा ने तब इसे बड़ा कस के कूटा था ।  तीस साल बाद मिली इस दुर्लभ खुशी में भी वकार को सबसे…