उदासी का राजकुमार या जली-कटी का होलसेल विक्रेता

कल एक बूढ़ी लाश के अंतिम संस्कार में सम्मिलित हुआ । पोस्ट-कोरोना युग में अब मौत इत्यादि पर अधिक नाटक-नौटंकी नहीं होता । विदाई समारोहों की आदत सी पड़ गयी है । फिर यह जाने वाला तो अपने पीछे अधिक नौहागर भी नहीं छोड़ गया । ऐसे में उठावने से लेकर शवदाह तक कई मर्तबा…

गुलमोहर के प्रेमपथ पर (कविता)

मार्ग पर चलते हुए, मनन-चिंतन करते हुए, जहां तक गयी दृष्टि, छितराए पड़े थे, लाल फूल ही लाल फूल…….. ग्रीवा उठाकर इधर-उधर देखा, चहुंओर हरा और लाल, अनंत नीला परिप्रेक्ष्य, बीच-बीच में पुष्पवर्षा, साधारण सड़क किसी चित्र-सी सुशोभित ।   ना मानो, तो कुछ नहीं,    हैं वही पुराने गुलमोहर, जो बूझ सको सौन्दर्य अगर…

No Genius, Indian Nationhood is not like the failed European Experiment!

A revisionist autodidact has gone bonkers. He is going around the world reinterpreting Indian history, culture, philosophy, constitution and the country’s lived and imagined reality. He can be dismissed as an irrelevant blabber-mouth, and it is true that neither he, nor his stunted intellect hold any credibility anywhere, especially in the India of 2022. But…

Walk the Dog, Carefully!

If walking your dog inside a sports stadium can get you transferred out of a shit hole to some idyllic heaven, imagine what could be achieved if you can make your dog pee or poo inside it? Exile to Tibet perhaps, or banishment to Xinjiang, if the trends hold. Perhaps the Grandees sitting in the…

कौन है वह निरा मूर्ख जो भारत को एक राष्ट्र नहीं मानता ?

अणुभाष अपने करों में संभालते ही यह चिरयुवा नायक स्वनामधान्य विद्वान हो जाता है । संवाद करते-करते कभी सनातन पर प्रवचन देने लगता है, तो कभी संविधान का भाष्य बताने लगता है । कभी तो विद्रोही स्वरूप धरकर जनक्रांति की चेतावनी देने लगता है, तो कभी शब्दानुशासन भंग करके उनकी नयी व्याख्याएँ करने लगता है…

एक टंगी हुई साँझ (कविता)

पीली, शुष्क, ज्येष्ठ की साँझ में, मद्धम पवन मदोन्मत्त हो, महीन धूल को इधर से उधर कर रही है – नीम की शाखें लहलहा रहीं, वायु के स्पर्श का अनुभव मुझे भी हुआ, पर मेरे वस्त्र-केश एवं मार्ग पर बैठा कुत्ता अलसाए पड़े हैं, यह साँझ कुछ टंग सी गयी है, लगता है अब कुछ…

Nation OR A Union of States – No Country for the Deluded Genius!

“India is merely a geographical expression,” Winston Churchill once said in exasperation. “It is no more a single country than the Equator.” The founder of Singapore, Lee Kuan Yew, also once echoed that sentiment, arguing that “India is not a real country. Instead it is thirty-two separate nations that happen to be arrayed along the…

Ask PERARIVALAN if he feels Sorry?   (Poem)

Kill the leader of a nation, Go to jail, Spend two lifetimes inside prison, Never give up the quest for your own freedom, Get freed, eventually. Come back home to a hero’s welcome, You killed an unsuspecting man after all, Who did not have any inkling that death was approaching, But that was his problem,…

आम नेताजी का भाषण (व्यंग्य धन फोकट चेक)

“किसी ने पूछा कि जी आप कह रहे हो कि दिल्ली में जनरेटर की दुकानें बंद हो गईं, तो क्या वो दुकानदार बेरोजगार हो गए ? क्या वो झक मार रहे हैं ? मैंने बताया नहीं जनाब वो आजकल सपने खरीद रहे हैं, और झूठ बेच रहे हैं । बढ़िया धंधा है ! अपने-अपने शहरों…

एक अवरुद्ध कहानी (कविता)

अधूरी कहानी के कहीं न पहुँच पाने का अवसाद है, कभी ललकारता, कभी धिक्कारता मेरा अंतर्नाद है, हर अगले शब्द, अगले वाक्य में कोई न कोई विवाद है, कलम की स्याही में भी जम चुका मवाद है, ऐसा से में निद्रा में झुला जाना मानो ईश्वरीय प्रसाद है, महत्वकांक्षा के पौधे में समर्पित हुआ यह…

इतिहास के ताले-तहख़ानों को खुलने दो

ताले टूटते हैं, तहखाने खुलते हैं, सर्वे होते हैं, विडियोग्राफी होती है, न्यायालयों में साक्ष्य प्रस्तुत किये जाते हैं, वाद- विवाद होता है तभी तो इतिहास करवट लेता है, भगवान जागते हैं और शताब्दियों पूर्व हुए अन्याय का हिसाब- किताब होता है । बंद ताला या तहखाना किसी साध का अंत नहीं हो सकता ।…