विकेट गड़े हैं, बल्ले खड़े हैं : कोहरे में क्रिकेट (कविता)

विकेट तो गड़े हैं बीच मैदान में, बल्ले किनारे खड़े हैं कबसे इंतज़ार में, खिलाड़ी देर से जमा हैं धुंध दरकिनार कर, ठंड मगर इतनी है कौन फेंके गेंदें भागकर, हाथ तैयार ही नहीं जेबों से निकलने के लिए, अलाव जले हैं बाउंड्री पर खून गरमाने के लिए, किटकिटाते, तापते, पौरुष को ललकारते, वक्त ज़ाया…

क्यूँ बनने दूँ ? (कविता)

जल रही अंगुलियों को, ठिठुर रही पगलियों को, सिगड़ी में न झोंक दूँ ? खून को बर्फ क्यूँ बनने दूँ ? (3) बढ़ रही चरबी को, मुटिया रही चमड़ी को, कसाई को न बेच दूँ ? वजन का बोझ क्यूँ लदने दूँ? (6) बहला रहे लफ्जों में, फुसला रहे ख्यालों में, एक कटार न खोंस…

When Cat’s Away, the Mice will Play (Poem)

His call shook me out of slumber, Boss summoned me to his room, With foggy mind I trundled, Dreadful of what lay in store, “Good afternoon, Sir”, “I’m proceeding on leave. Take care”. I let out the deepest of breaths, Felt quite weightless, and oh so free! (8) Flew back to my dear old cabin,…

#HASH (Poem)

Between Seventh Heaven and Cloud Nine, Welcome to this cosy pad of mine, Let us someday be partners in crime, Light up and lose track of Papa Time. Just took some drags of hash and nicotine, Nothing soothes like this fucking anodyne, Without you having blurted even a word I can comprehend your feelings sublime….

सलमान सर्पदंश प्रसंग- अभियोग एवं निष्कर्ष

“…..सलमान को काटा !” हेडलाइन लंबी रही होगी, जल्दी में भाग रहे न्यूज़ टिकर पर मैं इतना ही पढ़ पाया । लव जिहाद का एंगल तो नहीं लगा, ईशनिन्दा अथवा बेअदबी करने वालों में से भी सल्लू लगता नहीं । और कुत्ते ने तो क्या ही काटा होगा ! कुत्ते अमीरज़ादों और छुट्टे सांडों को…

The Existential Stasis (Poem)

Sun is sinking into the ashtray of night, Moon shall bring with it cups of delight, With light shall disappear matters mundane, Darkness might encourage hope unrestrainted. Cares of the day are reborn as nightmares, Daydreams manifest as demons unhinged, What I consume is what I have become, What I have become remains undefined. Sayonara…

Lynching is not Enough, the Corpse must be Hanged (A Lament)

“Capital punishment should be outlawed, Sacrilege should be punished with death! Get us more protection under the laws, Let us then enforce these laws ourselves.”          (the irony is lost on the liberal who declares this) Their Books apparently preach tolerance, The Believers are petty and vengeful, To always play victims, yet lynch others With hypocritical…

बाड़ू बाड़मेरी की कीड़ियों का सच

बचपन में चींटियों पर बहुत निगाह जाती थी । खड़े हो जाने और लंबे हो निकलने के साथ चींटियाँ दृष्टि से ओझल होती गईं । एक दिन आवारागर्दी कर हॉस्टल लौटे तो बाड़ू बाड़मेरी के खाखरों में सहस्त्रों चींटियों को प्रीतिभोज करते पाया । बाडू ज़ोर से चीखा, “कीड़ियाँ!”, और अपना माथा पकड़ लिया ।…

लिखने के सिवाय (कविता)

लिखने के सिवाय, जब बचा नहीं उपाय, तब लगे लिखने !   (3) लिखते हुए खो गए, संज्ञा शून्य हो गए, कैसे लिख दें ?  (6) लिखने के अलावा, लगे जीवन ही छलावा, अब क्या लिख दें ? (9) लिखना था, लिख लिया, अमृत-विष पी लिया, चल, अब निकलें?  (12) #लेखन #लेखनी #लेखक #writing #existence #existentialcrisis