कौन है वह निरा मूर्ख जो भारत को एक राष्ट्र नहीं मानता ?

अणुभाष अपने करों में संभालते ही यह चिरयुवा नायक स्वनामधान्य विद्वान हो जाता है । संवाद करते-करते कभी सनातन पर प्रवचन देने लगता है, तो कभी संविधान का भाष्य बताने लगता है । कभी तो विद्रोही स्वरूप धरकर जनक्रांति की चेतावनी देने लगता है, तो कभी शब्दानुशासन भंग करके उनकी नयी व्याख्याएँ करने लगता है…

एक टंगी हुई साँझ (कविता)

पीली, शुष्क, ज्येष्ठ की साँझ में, मद्धम पवन मदोन्मत्त हो, महीन धूल को इधर से उधर कर रही है – नीम की शाखें लहलहा रहीं, वायु के स्पर्श का अनुभव मुझे भी हुआ, पर मेरे वस्त्र-केश एवं मार्ग पर बैठा कुत्ता अलसाए पड़े हैं, यह साँझ कुछ टंग सी गयी है, लगता है अब कुछ…

Nation OR A Union of States – No Country for the Deluded Genius!

“India is merely a geographical expression,” Winston Churchill once said in exasperation. “It is no more a single country than the Equator.” The founder of Singapore, Lee Kuan Yew, also once echoed that sentiment, arguing that “India is not a real country. Instead it is thirty-two separate nations that happen to be arrayed along the…

Ask PERARIVALAN if he feels Sorry?   (Poem)

Kill the leader of a nation, Go to jail, Spend two lifetimes inside prison, Never give up the quest for your own freedom, Get freed, eventually. Come back home to a hero’s welcome, You killed an unsuspecting man after all, Who did not have any inkling that death was approaching, But that was his problem,…

आम नेताजी का भाषण (व्यंग्य धन फोकट चेक)

“किसी ने पूछा कि जी आप कह रहे हो कि दिल्ली में जनरेटर की दुकानें बंद हो गईं, तो क्या वो दुकानदार बेरोजगार हो गए ? क्या वो झक मार रहे हैं ? मैंने बताया नहीं जनाब वो आजकल सपने खरीद रहे हैं, और झूठ बेच रहे हैं । बढ़िया धंधा है ! अपने-अपने शहरों…

एक अवरुद्ध कहानी (कविता)

अधूरी कहानी के कहीं न पहुँच पाने का अवसाद है, कभी ललकारता, कभी धिक्कारता मेरा अंतर्नाद है, हर अगले शब्द, अगले वाक्य में कोई न कोई विवाद है, कलम की स्याही में भी जम चुका मवाद है, ऐसा से में निद्रा में झुला जाना मानो ईश्वरीय प्रसाद है, महत्वकांक्षा के पौधे में समर्पित हुआ यह…

इतिहास के ताले-तहख़ानों को खुलने दो

ताले टूटते हैं, तहखाने खुलते हैं, सर्वे होते हैं, विडियोग्राफी होती है, न्यायालयों में साक्ष्य प्रस्तुत किये जाते हैं, वाद- विवाद होता है तभी तो इतिहास करवट लेता है, भगवान जागते हैं और शताब्दियों पूर्व हुए अन्याय का हिसाब- किताब होता है । बंद ताला या तहखाना किसी साध का अंत नहीं हो सकता ।…

तेरह साल बाद बाइज्ज़त बरी  – पुलिस को लताड़, निचली अदालत पर चुप्पी

अभी हाल ही में अनुसूचित जनजाति का एक युवक 13 बरस का कारावास काटकर भोपाल जेल से रिहा हुआ । उच्च न्यायालय ने उस पर लगे हत्या के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया । माननीय न्यायालय ने तीखे स्वर में पुलिस की भर्त्सना की और समूची जांच को मनघड़न्त, गैर-जिम्मेदार और विद्वेषपूर्ण पाया…

You knew ……(A Poem on Civilization)

You knew….. Yet you…. Kept up…. the charade of praying over a structure where lay buried remains of Idols, Universally revered. Now you act as- Poor innocents of history, Shameless encroachers, Arrogant aggressors, Devious thieves, Hapless victims of the past, as well as the present. Not an iota of regret, Not a hint of remorse,…

The FALL of ROY- An Obituary for Andrew Symonds (Poem)

( I wrote this poem in 2009. Pup had refused to stand-by Symo, and the latter was sent home by the Australian team management. His career seemed to be as good as over.) Warnie’e era was over, the Pigeon had flown, The explosive Gilly retired, giant Haydos gone, Suckers took over the Cricket Down Under,…

सत्या एकदम डेंजर था, भीखू तो बस बदनाम हो गया

बार का दरवाजा खुलता है । हेंडल खिंचने की आवाज़ सुनाई देती है । क्या यह सत्या की अंतरात्मा की आवाज़ है? या फिर मौत की ? शायद उसपर चढ़े हुए बदले के फितूर की हो? ऊंची वॉल्यूम पर गाना बज रहा है – हाँ मुझे प्यार हुआ, प्यार हुआ अल्लाह मियां , भरी बरसात…

चीन, चौथी वेव और आता हुआ लॉकडाउन? (खरीखोटी)

का गुरु? चौथी वेव कब बुला रहे ? अरे आयेगा, आयेगा । धीरज रखिए । बताकर नहीं न आयेगा । अपने टाइम पर आयेगा । चीन को देख रहे हैं ना । हालत खराब है मतलब, एकदम खराब । औ’ जब कोरोना चीन का, जिसने उसे जन्म दिया, पीछा नहीं छोड़ रहा है, तो हमारा…