ए कोल्ली, रण कब बनाएगो? टिप्स लेगो के? ( क्रिकेट बकैती)

इंग्लैंड से एक टेस्ट छोडकर भाग आए, आईपीएल पूरा होग्या, विश्वकप में पाकिस्तान से पिट लिए, दीवाली निकल गयी, कोच बदल गया, आधी कप्तानी छिन गई, आराम की खातिर एक टेस्ट छोड़ दिया- इतना कुछ हो लिया पर विराट कोल्ली, तुझसे रन कोणी बन रे । थारा बल्ला नू जो साँप सूंग कर गियो छो, अब तक तो वा मर भी गियों होगो, पर थंसे अब बी गाड़ी खिंचती न लागरी ।

यो तो थारो और राहुल द्रविड़ को साथ में पहलो टेस्ट रियो, और तू इसमें भी जिर्रों पर आउट हो लियो । गंजो भोगल्यो बता रियो थो कि बतोर कप्तान यो थारो रेकॉर्ड दस्वों जिर्रो हो ग्यो, और थारा पाछे पटोदी से जो केवल पाँच बारी शून्य पे आउट होयो । अर दादा और माही तो चार-चार बार ही रन नी बना सक्या, पर थने तो लुटिया ही डुबो दी एकदम ।

खैर, आज सुबह अजिंक्या को निकाल कर तो तू बढ्या कियो । अब पत्ता नी थने निकाल्यो कि सर सब ने ?यो भी ठीक है कि उसे चोटिल करार बता दियो । भई सीनियर खिलाड़ी से, लाट साब से, होम ग्राउंड से निकालबो चोखो न लागे। पर होर कर्रें बी क्या ? साल भर होणे को आया, रहाणे से ही रन ना बनरे । 12 टेस्ट , 21 पारी – कम नी होते इतने- एक शतक ना लगा उससे । साल भर में औसत भी रहा बीस से कम!  मौके पूरे मिले- ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत, सब जगह तो खिलाया । एकबार 67 बनाए इंग्लैंड के खिलाफ मद्रास मे, बढ़िया खेल्यो, और एक बार पुजारा के साथ तो जम ही ग्यो लॉर्ड्स पर ।  तब घणी नाजुक रही स्थिति भारत की । दोनी टीका रिया पचास ओवर और सौ रण जोड्या, मैच भी पल्ट्यो । फेर भारत मेच जीत्यो भी । पर गाड़ी आगे ना बढ़ सकी रहाणे की । पिछले मेच में भी प्रदर्शन ढीलो रियो, तो फिर हूँ क ताइं ड्रॉप ही करणो छो, और तो काईं । नया लड़का भी अब आ रिया है – अय्यर, गिल, मयंक, यादव – सबको मौको मिलबा चाही ।  

और जो बात री 12 टेस्ट, 21 पारी की, तो भाईला, ये कोली को भी शतक मारे आज हों ली बाइस पारियाँ । इस साल रन औसत भी तीस से कम रियो । ज्यादेतर तो टिक ही ना पा रे , और कभी टिक भी जाए तो झटके में बिकिट फेंक दे । कहाँ तो सौ से कम बात नी होत्ती थी, और अब दो साल हो गए, एक सौ नी मारा – न वन डे में, न टेस्ट में ! खतम सा ही हो ग्या बस ।

जे क्या हो ग्या कोल्ली जी आपको ? कोई केरा बल्ले का मुंह जियादा खोल रे, कोई बोलरा हत्था भोत टाइट पकड़ते । यो भी सुनने में आरा की यांवाँ की बातों में कुछ जियादा ध्यान दे रहे – मतबल खाना के है, पिन्ना के है, फटाके कब-कितने-कैसे फोड़ने इत्यादि ।  देखो इब क्या है कि ये राहुल द्रविड़ साहब आ गए है कोच बन के । ये ठहरे सिरियस टाइप आदमी- भाई, रण बणा नित्तो घर बैठ वाले । तो विराट जी, निवेदन ये हैं कि अब आप ज्ञान बांटने की बजाय थोड़ा पुराने खिलाड़ियों और हमारे जैसे गूढ़ जानकारों से बैटिंग टिप्स ले लो ।

उम्मीद ये भी करता हूँ कि बैटिंग को आपने बल्लेबाजी वाले अर्थ में ही लिया होगा, अन्यथा नहीं । बरना लेने के देने पड़ सकते हैं ……

जाते-जाते ये भी कह देत्ता हूँ कोल्ली भाई कि इस पुजारा को भी अब चलता करो । पर पहले आप थोड़े बड़े रण बना लो, उसके बाद लेना कोई बड़ा फैसला । जनवरी उन्नीस से पच्चीस टेस्ट और 41 पारियाँ हो गई , पर इस आदमी ने एक सैंकड़ा न जड़ा । दो साल से पैंतीस-सैंतीस के औसत से रण बनाकर एहसान लाद रिया है । हाँ ऑस्ट्रेलिया में बॉडी पर कुछ प्रहार झेले थे, पचासे भी बनाए थे, इंग्लैंड में भी दो-तीन दफा काम के रण बनाए । पर नंबर तीन, चार और पाँच को इससे बहुत अधिक कुछ करना चाहिए । खासकर जब वह 92, 96 और 79 टेस्ट खेल चुके हों ।

दूसरी पारी के लिए दोनों भाइयों – पुजारा एवं कोल्ली को शुभकामनायें !

राहुल सर साब की जय हो !

और इस दिसंबर मैं आपको सिखाऊँगा बैटिंग कैसे करते हैं – मेरे साथ टिप्स लीजिये नेट पर (नो नेट्स प्लीज़) !


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