हाय, मैं आहत हो गया ! (कविता)

हाय, मैं आहत हो गया, क्यूँ ली तुमने जम्हाई, क्यूँ मुस्काए मुझको देखकर, क्यूँ पलकें ही झपकाईं, क्यूँ झटका देकर ग्रीवा को, माथे से लटें सरकाईं, हाय, मैं आहत हो गया, तुमको लाज भला नहीं आई ! इतना कम था क्या, जो फिर ले बैठे अंगड़ाई, ऊंचे हाथ खेञ्च कर पीछे, पृष्ठ बढ़ा अल्हड़ता से…

कोई बड़ी बात नहीं है

चार बच्चों का बाप होकर बढ़ती जनसंख्या का रोना रोना कोई बड़ी बात नहीं है । केवल अपने आप को भरमाना भर है कि बच्चे भले आपके हों, पर आप उनके बाप नहीं भी हो सकते हैं । खासकर तब जबकि आप संसद परिसर में उपस्थित हों । चाहिए थोड़ा-सी कल्पना शक्ति, और बेहिचक दोगलापन…

कविता करना अपराध है (कविता)

कविता नहीं करना कोई अपराध नहीं हो सकता- न लिखकर पुस्तकें अलमारियों पर न लादना,  न पढ़कर उन्हें दिमाग पर कोई बोझ ही डालना, न सुनकर किसी की बनाई दुनिया में खो जाना, न सुनाकर उन्हें दुनियावालों को बेवजह भरमाना, कविता नहीं करना कोई अपराध नहीं हो सकता । बल्कि कविता करने से बड़ा अपराध…

हर सुबह, सुबह जैसी ही होती है(कविता)

हर सुबह, सुबह जैसी ही होती है, आँखें खुली नहीं तामझाम में फसा देती है । संसार भले कहीं बुलाए, न-बुलाये, यह जीवन में धका ही देती है । जागिए चौंक कर या चुंबन-आलिंगन से, स्वप्न से निकालकर यथार्थ पर गिरा देती है । संकल्प लिवा देती है नाना-प्रकार के, साँझ तक के सहस्त्रों कार्य…

फॉर्म हुआ फुर्र, कोहली होजा हुर्र

शास्त्री तो बहुत पहले ही रेस्ट prescribe कर दिया, सनीभाई ने इस आरामखोरी को criticize भी कर दिया, कपिल पाह्जी ने ‘drop him’ ऐसा advice कर दिया, चोपड़ी-भोगली ने फिर भी कोहली को eulogize ही किया, क्या रे विरटवा, professionalize करते-करते सब commercialize कर दिया? रोहित ने भले खराब फॉर्म को trivialize कर दिया हो,…

SushLaMo, SuMo or Bonnie & Clyde?

The newest couple has broken the internet by coming out of the closet. The news and the pictures are too hot to handle. The hustler seems happy, the princess looks enamoured. Uncles are shocked, aunties are worried. For their husbands, of course, more than the damsel. They know she would somehow manage, she always does….

एक ताले का मद (कविता)

भरी गर्मी की भीषण दोपहर में घर के फाटक पर टंगा हेरिसन का ताला हूँ, धूप में चमचमाता, ज्येष्ठ ऊष्मा को झेलता, मैं ही वह हिम्मतवाला हूँ – जो खड़ा है प्रतिरोध बन घर और संसार के बीच, जो आने वाले शत्रु से सतर्क है, अपनी मुट्ठी भींच जो झेल रहा है लू प्रचंड, इस…

साहेब के चार शेर

अब तक ये चार शेर गांधीवादी थे । थोड़े दबे-सहमे हुए, झुके-झुके से- शीतल और सौम्य । गुर्राना तो दूर, जनता की मांग पर कभी-कभी मिमिया भी देते थे । ऐसा नहीं है कि उनकी आक्रामकता पूर्णतया मिट गयी थी- घुसलखाने और शयन कक्ष में उनके ब्रह्मचर्य प्रयोग अनवरत चला करते थे । पर जनता…

The Vicarious Pain (Poem)

The Generalissimo fell yesterday, was vanquished by the Conquistador. Abject was the humiliation- Pummelled from the very beginning, Bludgeoned to provide the coup de grace. I did not fight alongside the General, Did not raise his banner nor shed my blood, Neither took blows, nor hit back for the Cause, There are no wounds I…

दुर्गा देवी वोरा की भूली-बिसरी वीरगाथा

दुर्गा देवी वोरा, और उनकी ननद, सुशीला, को लाहौर से दिल्ली बुलवा भेजा गया, ताकि वे भगत सिंह के फेरवेल में सम्मिलित हो सकें । 8 अप्रेल 1929 को दिल्ली के कसीदिया पार्क में एक पिकनिक का आयोजन हुआ, जिसमे सम्मिलित हुए चन्द्रशेखर आज़ाद, भगवती चरण वोरा, भगत सिंह, सुशीला, दुर्गा और उनका पुत्र सचीन्द्र…