मैं चिल्लाया ‘सईद अनवर’ (कविता)

सड़क पर चलते-चलते, सौहार्द पर मनन करते,  यकायक मेरा पाँव गया मुड़, मैं ज़ोर से चिल्लाया, सईद अनवर, स ई ई द अन वर र र र….. लोगों ने आव देखा न ताव, ज़मीन पर लेट गए सोचकर, कि अब होगा धमाका, क्या पता बरसें गोलियां, कुछ नहीं हुआ तो भी उन्हें डर ने घेरे…

भाषाई फुलझड़ी : धुलेलकर की हिंदुस्तानी के नाम पर संविधान सभा में धमाचौकड़ी

संबिधान सभा की दूसरी बैठक, तिथि 10 दिसंबर, 1946 सेक्षंस एवं कमेटी के मसले पर सदन में गरमागरम बहस चल रही थी । एक तरफ थे कृपलानी तथा जयकर, दूसरी तरफ लामबंद थे सुरेश चन्द्र बनर्जी , श्यामप्रसाद मुखर्जी, टंडन, केएम मुंशी और हरनाम सिंह । पंडित नेहरू कृपलानी को संघर्ष विराम का इशारा करके…

उसकी यात्रा और इसका भ्रमण (व्यंग्य)

नहीं साहब, किसी मित्र के विवाह में सम्मिलित होना कोई अपराध नहीं है, न हो सकता है । विवाह किसी का भी हो, मंगलमय अवसर है । और जो स्वयं वैवाहिक बंधन में जकड़े जाने को प्रस्तुत है, उसपर वामपंथी, लिब्रांडु अथवा वोक जैसे ठप्पे भी नहीं लगाए जा सकते ।  वह कैसा वामी-कोमी जो…

मैं भी परशुराम (कविता)

एक हाथ में फरसा मेरे, दूसरे में वेद हो, शोषण होते देख मुझको परशुराम-सा क्रोध हो, आततायी को अनुशासित करना मेरा नित्य कर्म, सनातन की सेवा ही हो अब से मेरा परम धर्म ।4। कर सकूँ बेधड़क होकर गोवंश तस्करों का संघार, काँप जाएं सहस्त्रार्जुन-संतति सुनकर मेरी सिंह दहाड़, राम को भी टोक सकने का…

जुबां हिन्दी हो या केसरी – अजय देवगुण को फर्क नहीं पड़ता

सुदीप किच्चा ने भाषाओं के बारे में कुछ ज्ञान बांटा । क्या कहा, ये किसी को ठीक से पता नहीं है । केजीएफ़ 2 चलने के अहंकार में कुछ कह गया होगा । ज़बान केसरी अंकल को तो एकदम पता नहीं था जब उसने पलटट्वीट किया जहां उसने हिन्दी को ‘हमारी’ मातृभाषा और राष्ट्रभाषा करार…

नौकरी के अक्षर – संज्ञा, विशेषण, क्रिया या विस्मयादिबोधक ?

इक्कीस अप्रेल को सिविल सेवा दिवस मनाया जाता है । किसी मित्र ने फेसबुक पर एक कविता साझा की, जिसमे विभिन्न सेवाओं के तीन-चार अक्षरों वाले एक्रोनिम, यानि परिवर्णी शब्दों के अधिकारी के नाम से जुड़ जाने, और उनसे उत्पन्न होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला गया था । यह लघु कविता मुझे वस्तुस्थिति के…

Finding Vegetables –A Sneak Peek into a small Farm in mid- April

Little did I expect to find anything in the farm except discarded gram stalks, piled-up husk and bundles of garlic after the harvest of wheat, dhania (coriander) and lehsun (garlic). I had ventured into the farm in to peep inside the well, and to take some pictures of the stone façade (kot), as well as…

कैसे डूब गया दिनकर दक्षिण के दूर दिशांचाल में ?

जिन दिनकर को समस्त भारतवर्ष ने राष्ट्रवादी चेतना एवं वीर रस के प्रखरतम राष्ट्रकवि के रूप मे जाना, उन्हीं रामधारी सिंह को जीवन के अंतिम वर्षों में विरक्ति-सी हो गयी थी । उनका आखिरी समय बहुत अवसाद में कटा । मद्रास में बीती अपनी अंतिम संध्या पर दिनकर ने डायरी में लिखा- “सब कुछ पाकर…

An Innocuous Question in the Age of Wokism

I was walking inside a park, when I ran into an old acquaintance. She was walking her baby in a pram. They live in Montreal, and were in Kota to attend a family function. We exchanged pleasantries and made casual small talk.  The baby, hardly a year old, screamed for attention. “ We’re just moving,…