दीप भर नहीं हूँ (कविता)

दीप भर नहीं हूँ केवल ज्योत हूँ मैं धर्म की प्रकाश में ही निहित मेरे सनातन का मर्म भी   (4) प्रज्ज्वलित हूँ आदि से   मैं पूर्वजों की संपदा प्रयास कर न बुझा सका मुझे कोई भी आक्रांता (8) अपनी ही धरा पर युगों से संघर्षरत   कोटि-कोटि आहुतियों से जीवन ये सिंचित रहा…

Hello Mr. Virat Kohli, How Much is Your Carbon Footprint?

I am a big fan of Virat Kohli. Not particularly of his cricketing skills or his attitude though, but of his eagerness to play a social activist. If he plays his game the right way, he might end up as India’s Thunberg, although Tendulkar’s peak level and popularity might still elude him. Then again, Woko…

“I have got AFGHAN BLOOD. There is nothing to be Scared of.”

If the blood flowing in your veins were Indian, and not Afghan, what then? Would it have made any difference? Pronouncements such as the above are symptomatic of false pride, racial arrogance and misplaced sense of superiority of some communities in India, vis-à-vis the others. I would put “ye Rajpoot khoon hai….” and “Jat ka…

पाकिस्तानी क्रिकेटरों की साफ़गोई का कायल होता जा रहा हूँ (व्यंग्य)

विश्व कप में बारह बार हारने के बाद पाकिस्तान को अंततः भारत पर जीत नसीब हुई । छियान्वे से हरे वकार युनूस के घावों पर अब जाकर कुछ मलहम लगा । कसम से जडेजा ने तब इसे बड़ा कस के कूटा था ।  तीस साल बाद मिली इस दुर्लभ खुशी में भी वकार को सबसे…

मैं फोड़ूँ तो चलता है (कविता)

खबरदार रोका जो मुझे,पटाखे फोड़ता गर दिख जाऊँ,जीता है मेरा पाकिस्तान,कमबख्त दिवाली थोड़ी है, काफ़िर लाख दें जलालतें,दो दलीलें मेरे वकील बन तुम,था करवा चौथ भी तो,पड़ोसी शौहर से कम थोड़ी है, कोई न टोके, पूछे न कुछ,लोकशाही को जिंदा रखना,तीस बरस में आया मौका,दिवाली तो हर बरस है मनना, तुम छोड़ो हो धुआँ-धुआँ,मैं करूँ…

WHY I REFUSE TO TWEET IN SUPPORT OF SHAMI

I refuse to tweet or put out a message in support of Shami. That is because I love Mohammad Shami, the Indian fast-bowler, a lot. I love that strong lad, built like a bull, for the jump in his stride, right before he delivers. His deliveries have that abrupt extra bounce that just grows on…

कुफ़्र-काफिर पर ऐतराज नहीं, झांट-झंटुए और *टुए पर है ? (निबंध)

परसों तक सब्र ही तोड़ते थे, कल कुफ़्र भी तोड़ दिया । सब्र का क्या है साहब । हम लोग काफिर हैं, बारह सौ साल से बुतशिकनों की नफरत खत्म होने का इंतज़ार कर रहे हैं । कश्मीर में आज भी हमारे लोग मारे जा रहे हैं । शर्म बस हमें आती नहीं । क्रिकेट…

सड़कें हर काम के लिए हैं (कविता)

जाम करने के लिए हैं,                                  (चक्काजाम) जाम-से-जाम करने के लिए हैं,                            (शराब) दुआ-सलाम करने के लिए हैं, नित्य काम करने के लिए हैं,                            (पाख़ाना)     माहौल बने तो शाही हमाम करने के लिए हैं,                (स्नान) नाटक सरेआम करने के लिए हैं,                           (नुक्कड़ नाटक) चुनावी ऐलान करने के लिए हैं,                            (सभाएं) सारे कायदे हराम करने के…

प्रदीप बनाम वोक् मीडिया – शब्द तो बहाना है, सत्य को दबाना है

हंगामा है क्यों बरपा,मुँह से निकला एक शब्द ही है,न्याय ही तो है माँगा,लिंचिंग तो नहीं की है. सड़कों पे नहीं बैठा,बेअदबी तो नहीं की है,कुछ सवाल ही हैं पूछे,दलाली तो नहीं ली है. सच्चाई उगलती, तीखे सवाल पूछती प्रदीप भंडारी की जिह्वा से हिंदी का एक आधिकारिक शब्द क्या निकल गया, तब से यह…

झाँट पर झंझावात क्यूँ , भाषा पर भारी संस्कार क्यूँ ?

भाषा का कार्य है वस्तुस्थिति का वर्णन करना, और संवाद स्थापित करना । इसपर रह-रहकर नैतिक और राजनैतिक प्रहार होते रहते हैं । भाषा को भ्रष्ट करके न सामाजिक समरसता लाई जा सकती है , न ही शब्दों और विन्यासों को नियंत्रित अथवा प्रतिबंधित करके लोगों को संस्कारित रखा या बनाया जा सकता है ।…

और क्या चल रहा है ?

डीजल का शतक लग चुका है , पेट्रोल नेल्सन पर है । रसोई गेस नौ सौ पार कर चुकी है, जल्द ही हजारी भी होगी । आज लगातार सातवें दिन कीमतें बढ़ी हैं । विकास ऊंची उड़ान पर है – गुरुत्वाकर्षण को पर करके अन्तरिक्ष पहुँच गया है । उड़ान कंपनी टाटा हो चुकी है…

और क्या होंगे (कविता)

ये मिलें न मिलें,बात हो न हो,चर्चे तो होंगे. (3) जानते भी न हों,मानते भी न हों,चाहते तो होंगे. (6) चूंकि रात के ये साथी,दुनिया साथ देख पाती,तो आशिक़ ही होंगे. (9) ————————————————————– bhopal #hindipoem #kavita #hindi #chandtara