अकबर के संतों से मिलने के नहीं हैं प्रमाण

किस्से-कहानियों का अकबर सर्वव्यापी है । बहुतेरे साधु-संतों के संग अकबर की मुलाकातों की किंवदंतियाँ प्रचलित हैं । बीरबल के किस्सों के हिसाब से अकबर सवालों, पहेलियों और गप्पों का भी बादशाह था । सत्यान्वेषी अकबर दीवान-ए-खास में बैठकर विभिन्न धर्माचार्यों के साथ धर्मचर्चाएँ किया करता था । बर्बर बाबर और कठमुल्ले औरंगजेब जैसे धार्मांध…

डंडे को प्रणाम है, डंडा ही समाधान है (कविता)

(डंडे से अभिप्राय दंड/punishment/कानूनी दंड से भी है और हाथ में पकड़े जाने वाले डंडे से भी) जो बैठ कर के सड़कों पर जो चीख-चीख गलियों में स्वतंत्रता का दंभ भर अभिव्यक्ति के नाम पर चरा रहे हैं बुज्जियाँ उड़ा रहे हैं धज्जियां कानून की, समाज की प्रधान की, विधान की शासन के सम्मान की…

फ़ाल्टन्यूज़ ने थूक के चाटा जब यूपी पुलिस ने मारा सच का चांटा

फ़ाल्टन्यूज़ नाम का एक गिरोह फर्जी खबरें बनाने, चलाने और सच के साथ छेदछाड़ कर नेटिज़न्स को बरगालने के काम में रिपब्लिक ऑफ ट्विटर पर अत्यधिक सक्रिय है । इस फ़ाल्टन्यूज़ को चलाने वाले दो वामपंथी दलाल – एक गंजा और किसी चिड़ियाघर से भागा एक भालू- किसी भी खबर में हेराफेरी कर उसे सत्यनिष्ठा…

फ़ेमिली मेन भाग 2 पर टीका-टिप्पणी : धृति बेटी तू जिहादीमर्दिनी, तेरी जय हो !

यह सिरीज़ वयस्क दर्शकों के लिए है और इसमे कहानी के समर्थन में अंतरंग दृश्यों सहित कटुवचन, अपशब्द और परिपक्व सामग्री शामिल है । फेमिली मेन की शुरुआत में ये दंभपूर्ण घोषणा मुझे बहुत थोथी जान पड़ी । मेरी इस ब्लॉगपोस्ट के लिए भी इस चेतावनी को लागू मानें। वैसे छूटते ही यह स्पष्ट कर…

वह कहीं नहीं गया (कविता)

उसका जाना तब तो जाना है अगर वह यादों से भी चला जाये वरना उसका फोन न उठाना संदेशों का जवाब न दे पाना दो-तीन सालों में किसी एक शाम को न मिल पाना यह सब पहले जैसा ही तो है कभी-कभार उसका ज़िक्र अब भी हुआ करेगा जब चार दोस्त साथ बैठेंगे उसके किस्से…

फूलों पर फिसले हुए (कविता)

फूलों पर फिसले हुए, पत्तियों के प्रति उदासीन, क्या ही मतलबी शौकीन ! रंगीनियत पर कुर्बान, चकाचौंध पर हलकान, गए-गुजरे लंपट आशिकों से ! (6) किसी ने कह दिया, वाह क्या रंग है ! क्या भीनी-भीनी गंध है ! भिनभिनाते भौरों से प्रेरित, मचलती तितलियों से मदोनमत्त, कसीधे पढ़ते रहे फूलों की शान में ।12।…

लौहपथगामिनी में दिव्य निपटान

(अगर आपको गंदगी , पाखाने और सच से घिन आती है तो कृपया आगे न पढ़ें , क्यूंकी यह ब्लॉग इन्हीं सब के बारे में है, और इसे पढ़ना भयावह हो सकता है ) वास्तविक टाइटल – “ट्रेन में टट्टी” बत्तीस घंटे का लंबा सफर है देवास से कोलकाता का । इतनी देर में किसी…

SL Bhyrappa’s Gruhabhanga (गृहभंग) – The Tale of a Woman’s Struggle against Poverty & Plague in pre-Independence Mysore

Bhyrappa’s semi-autographical masterpiece, Gruhabhanga, was published in 1970. In scope of its tragedy, and depth of the characters, the novel is perhaps unsurpassed in modern Indian literature. Gruhabhanga is the story of the heroic struggle of a woman, Nanjamma, who refused to give up in face of adversity and apathy. She battled against poverty, epidemic,…

बड़ा बाहुबली बनता था (कविता)

सांसें तो बाकी हैं तेरी हस्ती लेकिन मिट गयी गाड़ी पलटे न पलटे तेरी गाँ तो फट गयी बड़ा बाहुबली बनता था भों के आज हर चिरकुट है तुझ पर हंस रहा बिना मरे ही तू टपक गया अब कहाँ तेरा डर रहा देखकर तुझको तो हँसेंगे अब सभी बंदर सी सही पर ज़िंदगी तो…

The Chinnaswamy Minefield of 1987- “We have Conquered the Hindus!”

As per the Dawn of Pakistan, Abdul Hafeez Kardar was in the Commentary Box, when Roger Binny was caught behind by Saleem Yousuf on Tauseef Ahmed’s delivery. Pakistan had just won the see-saw fifth test, and with it the series, by 16 runs. This is when the first and very influential captain of Pakistan, later…

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना – एक वोटर से ज्यादा, एक कार्यकर्ता से कम (कविता)

संचार क्रांति के इस युग में मैं महज एक वोटर नहीं रहा; सोशल मीडिया के आगमन के साथ ही मेरी मासूमियत जाती रही; तटस्थ रहना हर काल में अपराध था, पर अब भी विचार न रखना, रख पाना, मेरी जड़ता का द्योतक होगा ।7। बिना कहीं की प्राथमिक सदस्यता गृहण किए भी मैं एक सिपाही…