मैं किस भारत से आता हूँ – कुपात्र वीर दास को मेरा जवाब

मैं भारत से आता हूँ । मैं किस भारत से आता हूँ? दुविधा में जीने वाले, बिके हुए, खोखले, नफरती टट्टुओं को दो भारत दीखते हैं । दो, बस दो ! भारत केवल जागे हुए और सुप्त, अमीर-गरीब, राजपरिवार या आम आदमी, कामकाजी और बेरोजगार, हिन्दू-मुस्लिम, पढे लिखे अथवा गवार, रेपिस्ट और भद्र में ही…

भीख तो कहना उचित नहीं पर कटी-छटी आज़ादी थी (कविता)

चुक चुके अंग्रेजों को एक दिन तो वापस जाना था,सैंतालीस नहीं तो अड़तालीस में टिकट कटवाना था।2। पढ़ते आए हैं बचपन से विश्व युद्ध की थकान थी भारीजाने वाले स्वतः गए, पर हम हाथ जोड़े रहें आभारी ? (4) आभारी उनके जो मान बैठे हम एक धरा पर दो राष्ट्र हैं,पलट कर हमसे झूठ कह…

मैं फोड़ूँ तो चलता है (कविता)

खबरदार रोका जो मुझे,पटाखे फोड़ता गर दिख जाऊँ,जीता है मेरा पाकिस्तान,कमबख्त दिवाली थोड़ी है, काफ़िर लाख दें जलालतें,दो दलीलें मेरे वकील बन तुम,था करवा चौथ भी तो,पड़ोसी शौहर से कम थोड़ी है, कोई न टोके, पूछे न कुछ,लोकशाही को जिंदा रखना,तीस बरस में आया मौका,दिवाली तो हर बरस है मनना, तुम छोड़ो हो धुआँ-धुआँ,मैं करूँ…

प्रदीप बनाम वोक् मीडिया – शब्द तो बहाना है, सत्य को दबाना है

हंगामा है क्यों बरपा,मुँह से निकला एक शब्द ही है,न्याय ही तो है माँगा,लिंचिंग तो नहीं की है. सड़कों पे नहीं बैठा,बेअदबी तो नहीं की है,कुछ सवाल ही हैं पूछे,दलाली तो नहीं ली है. सच्चाई उगलती, तीखे सवाल पूछती प्रदीप भंडारी की जिह्वा से हिंदी का एक आधिकारिक शब्द क्या निकल गया, तब से यह…

और क्या होंगे (कविता)

ये मिलें न मिलें,बात हो न हो,चर्चे तो होंगे. (3) जानते भी न हों,मानते भी न हों,चाहते तो होंगे. (6) चूंकि रात के ये साथी,दुनिया साथ देख पाती,तो आशिक़ ही होंगे. (9) ————————————————————– bhopal #hindipoem #kavita #hindi #chandtara

इमरान, आपने घबराना नहीं है (कविता)

बीते हफ्ते तालिबान खान का दिल भर आया संयुक्त राष्ट्र में प्री-रेकॉर्डएड स्पीच चलवाया अमरीका को निरा-कृतघ्न राष्ट्र बतलाया पाकिस्तान को वार ऑन टेरर का विक्टिम दिखाया पश्चिम पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया कश्मीर के लिए इमरान को बहुत रोना आया भारत को फासीवाद की गिरफ्त में बताया देखो ,मोदी ने बातचीत को आगे…

पलट! पलट! (कविता)

बहुत दिन से पलटू पलटा नहीं है,पलटे बिना मगर उसका गुज़ारा नहीं है,अब पलटेगा, कब पलटेगा,कयास लगाते रहिये,बीच बीच में जाति कीहवा बनाते रहिये.जाति की राजनीति उसके मन- प्राण हैं,जाति न चले तो फिर काम तमाम है.आशा ही नहीं हमें पूर्ण विश्वास है,इसकी पलटने की इच्छा का आभास है,रोटी जब सिकती है तो पलटती ही…

अकबर के संतों से मिलने के नहीं हैं प्रमाण

किस्से-कहानियों का अकबर सर्वव्यापी है । बहुतेरे साधु-संतों के संग अकबर की मुलाकातों की किंवदंतियाँ प्रचलित हैं । बीरबल के किस्सों के हिसाब से अकबर सवालों, पहेलियों और गप्पों का भी बादशाह था । सत्यान्वेषी अकबर दीवान-ए-खास में बैठकर विभिन्न धर्माचार्यों के साथ धर्मचर्चाएँ किया करता था । बर्बर बाबर और कठमुल्ले औरंगजेब जैसे धार्मांध…

डंडे को प्रणाम है, डंडा ही समाधान है (कविता)

(डंडे से अभिप्राय दंड/punishment/कानूनी दंड से भी है और हाथ में पकड़े जाने वाले डंडे से भी) जो बैठ कर के सड़कों पर जो चीख-चीख गलियों में स्वतंत्रता का दंभ भर अभिव्यक्ति के नाम पर चरा रहे हैं बुज्जियाँ उड़ा रहे हैं धज्जियां कानून की, समाज की प्रधान की, विधान की शासन के सम्मान की…

फ़ाल्टन्यूज़ ने थूक के चाटा जब यूपी पुलिस ने मारा सच का चांटा

फ़ाल्टन्यूज़ नाम का एक गिरोह फर्जी खबरें बनाने, चलाने और सच के साथ छेदछाड़ कर नेटिज़न्स को बरगालने के काम में रिपब्लिक ऑफ ट्विटर पर अत्यधिक सक्रिय है । इस फ़ाल्टन्यूज़ को चलाने वाले दो वामपंथी दलाल – एक गंजा और किसी चिड़ियाघर से भागा एक भालू- किसी भी खबर में हेराफेरी कर उसे सत्यनिष्ठा…

फ़ेमिली मेन भाग 2 पर टीका-टिप्पणी : धृति बेटी तू जिहादीमर्दिनी, तेरी जय हो !

यह सिरीज़ वयस्क दर्शकों के लिए है और इसमे कहानी के समर्थन में अंतरंग दृश्यों सहित कटुवचन, अपशब्द और परिपक्व सामग्री शामिल है । फेमिली मेन की शुरुआत में ये दंभपूर्ण घोषणा मुझे बहुत थोथी जान पड़ी । मेरी इस ब्लॉगपोस्ट के लिए भी इस चेतावनी को लागू मानें। वैसे छूटते ही यह स्पष्ट कर…

वह कहीं नहीं गया (कविता)

उसका जाना तब तो जाना है अगर वह यादों से भी चला जाये वरना उसका फोन न उठाना संदेशों का जवाब न दे पाना दो-तीन सालों में किसी एक शाम को न मिल पाना यह सब पहले जैसा ही तो है कभी-कभार उसका ज़िक्र अब भी हुआ करेगा जब चार दोस्त साथ बैठेंगे उसके किस्से…