बंसल सर : जिस गणित के गुरु ने पढ़ाया हास्य-विनोद

मास्टर गणित के थे , पढ़ाई लेकिन ज़िंदगी  । गणित , और कोई भी अन्य विषय, कितना विनोदपूर्ण हो सकता है, यह विनोद जी ही नहीं समझाते तो समझाता कौन ? लेखक, पत्रकार या कोमेडियन होते तो भी बम्पर हिट रहते, पर फिर कोटा नगरी का कायाकल्प नहीं हो पाता । सत्रह से उन्नीस साल…

फिर एक आत्मघात – सवाल,समस्या,कर्म या अकर्म?

हर मौत का मतलब निकले ये आवश्यक नहीं । हर घटना के पीछे कुछ गहरा कारण हो ये ज़रूरी नहीं । किसी ने आत्मघात कर लिया तो क्यूँ किया? तुम खबर मिलते ही सूइसाइड नोट ढूँढने लगे । खुद को पुलिसवाला,फोरेंसिक एक्सपर्ट,वकील समझकर सुराग तलाशने लगे। कुछ नहीं मिला तो कयास लगाने लगे – अफेयर…

Maine Dil Se Kahaa

Death of a close acquaintance robs us of objectivity. Grief keeps pouring out of welled-up eyes and chokes our breaths. Attendant rituals and surrounding mourners give rise to claustrophobia. It is then that numbness sets in. Profound gloom envelops everything. Days become long and dark, nights darker and endless. Pain might heal, loss always haunts….