फिल्म शूल में मनोज वाजपेयी – काहे का समर,कौन से प्रताप, किधर का सिंह?

(सिनेमा नहीं देखे हैं तो नहीं बुझाएगा । फिर सवाल यह उठता है कि नहीं देखे हैं तो क्यूँ नहीं? सिनेमा देखते ही नहीं हैं , या फिर कुछ कुछ होता है और नोटिंग हिल से ज्यादा वास्तविकता झिलती नहीं!) इतना धारदार किरदार नहीं देखा । मानो ज़िंदगी के पत्थरों पर घिस-घिस कर पैना हुआ…

घुटने टिकाये सर झुकाये पुलिस अच्छी नहीं लगती

घुटने टिकाये,सर झुकाये, पुलिस अच्छी नहीं लगती, वास्तविक होती हुई भी, यह तस्वीर सच्ची नहीं लगती ।4।   जो भीड़ से माफी मांग रहे, उनपर खाकी नहीं फबती, तोड़फोड़ के तमाशबीनों पर, वर्दी एकदम नहीं जँचती ।8।   इतना ही भर गए हो ग्लानि से, तो छोड़ो डंडा ,उठाओ कमंडल, क्षमाक्षील औ’ क्षमाप्रार्थी, खोल दो…

माई नेम इज़ शाहरुख अनुराग मिश्रा & आई एम ए टिक टॉक आर्टिस्ट

खुद का पाणे छिपा लिया रवीश कुमार ने , पर शाहरुख के अनुराग पर नहीं रुका  । ‘बामन , कुत्ता , हाथी, नहीं जात के साथी’  वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए इस भूमिहार – ब्राह्मण ने जिस तरह मिश्रा-मिश्रा का भौंपू अपने ‘प्राइम टाइम’ प्रोपेगेंडा पर बजाया , उससे इस बात का जवाब अंततः…

पुलिस बेचारी और करती भी क्या ?

    पुलिस बेचारी और करती भी क्या ? चारों दुर्दांत द्रुत धावक निकले, पलक झपकते ही सौ मीटर भग लीस, सिपाही उसेन बोल्ट तो हैं नहीं , पर शार्प शूटर गजब के निकले , धाँय-धाँय धाँय-धाँय और चारों ढेर ! (6)   पुलिस बेचारी और करती भी क्या ? भीड़ से बचाकर लाए थे…

रेड रोड पर इंसाफ की इरादतन हत्या – इतिहास में जब-जब पुलिस को झुकने को कहा गया,वह रेंगी है

  वारदात करते समय संबिया ऑडी क्यू 7 चला रहा था । तीन साल बाद अदालत से बरी होने के बाद  वह स्वयं ही  एक सफ़ेद पॉर्श चलाकर अपने घर लौटा । यूं वो किसी ड्राईवर के साथ बैठकर भी जा सकता था लेकिन खुद गाड़ी चलाकर उसने बंगाली समाज और सिस्टम को जोरदार तमाचा…

मल गया उछल , सन गया सत्ता का मलमल

  महकमा  बन गया है एक गुरुत्वहीन पाख़ाना , जहाँ मल हवा में उछल रहा है ,तैर रहा है, पंखों  से टकरा टकरा कर छिटक जाता है  , छत-दीवारों पर मॉडर्न आर्ट की तरह चिपक गया  है ।1।   गुरुत्वाकर्षण नहीं रहा अब , बस बड़े-बड़े गुरु बैठे हैं , फाइलों पर रख-रख कर मल,…