The Itaewon Stampede – Memories of the Hooker Hill

 The bad news from Itaewon has left me nostalgic, more than depressed. It is a strange feeling, wishing that you were there when the stampede occurred on the Halloween night, helping the victims, rather than in the safety of your home, thousands of miles away. I carry such frolicking memories of the locality that it…

आम नेताजी का भाषण (व्यंग्य धन फोकट चेक)

“किसी ने पूछा कि जी आप कह रहे हो कि दिल्ली में जनरेटर की दुकानें बंद हो गईं, तो क्या वो दुकानदार बेरोजगार हो गए ? क्या वो झक मार रहे हैं ? मैंने बताया नहीं जनाब वो आजकल सपने खरीद रहे हैं, और झूठ बेच रहे हैं । बढ़िया धंधा है ! अपने-अपने शहरों…

संजय दत्त को पुलिस ने आतंकवादी साबित होने से कैसे बचाया ?

12 मार्च 1993 को दोपहर डेढ़ से तीन चालीस के बीच मुंबई में 12 बड़े धमाके हुए । दाऊद इब्राहिम,उसके गुर्गे टाइगर मेमन और कई अन्य दुर्दांतों ने आईएसआई के साथ मिलकर एक खतरनाक षड्यंत्र रचा था । उन्हें पूरी उम्मीद थी कि ब्लास्ट के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़क उठेंगे । इसलिए बम बनाने के…

फिल्म शूल में मनोज वाजपेयी – काहे का समर,कौन से प्रताप, किधर का सिंह?

(सिनेमा नहीं देखे हैं तो नहीं बुझाएगा । फिर सवाल यह उठता है कि नहीं देखे हैं तो क्यूँ नहीं? सिनेमा देखते ही नहीं हैं , या फिर कुछ कुछ होता है और नोटिंग हिल से ज्यादा वास्तविकता झिलती नहीं!) इतना धारदार किरदार नहीं देखा । मानो ज़िंदगी के पत्थरों पर घिस-घिस कर पैना हुआ…

घुटने टिकाये सर झुकाये पुलिस अच्छी नहीं लगती (कविता)

घुटने टिकाये,सर झुकाये, पुलिस अच्छी नहीं लगती, वास्तविक होती हुई भी, यह तस्वीर सच्ची नहीं लगती ।4। जो भीड़ से माफी मांग रहे, उनपर खाकी नहीं फबती, तोड़फोड़ के तमाशबीनों पर, वर्दी एकदम नहीं जँचती ।8। इतना भर चुके हो ग्लानि से, तो छोड़ो डंडा ,उठाओ कमंडल, क्षमाक्षील औ’ क्षमाप्रार्थी, खोल दो वर्दी,पहन लो वलकल।12।…

माई नेम इज़ शाहरुख अनुराग मिश्रा & आई एम ए टिक टॉक आर्टिस्ट

खुद का पाणे छिपा लिया रवीश कुमार ने , पर शाहरुख के अनुराग पर नहीं रुका  । ‘बामन , कुत्ता , हाथी, नहीं जात के साथी’  वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए इस भूमिहार – ब्राह्मण ने जिस तरह मिश्रा-मिश्रा का भौंपू अपने ‘प्राइम टाइम’ प्रोपेगेंडा पर बजाया , उससे इस बात का जवाब अंततः…

पुलिस बेचारी और करती भी क्या ? (कविता)

पुलिस बेचारी और करती भी क्या ? चारों दुर्दांत द्रुत धावक निकले, पलक झपकते ही सौ मीटर भग लिए, सिपाही उसेन बोल्ट तो नहीं , पर शार्प शूटर गजब के निकले , धाँय-धाँय, धाँय-धाँय किया चारों को ढेर ! (6) पुलिस बेचारी और करती भी क्या ? भीड़ से बचा लाए थे हत्यारों को ,…

रेड रोड पर इंसाफ की इरादतन हत्या – इतिहास में जब-जब पुलिस को झुकने को कहा गया,वह रेंगी है

  वारदात करते समय संबिया ऑडी क्यू 7 चला रहा था । तीन साल बाद अदालत से बरी होने के बाद  वह स्वयं ही  एक सफ़ेद पॉर्श चलाकर अपने घर लौटा । यूं वो किसी ड्राईवर के साथ बैठकर भी जा सकता था लेकिन खुद गाड़ी चलाकर उसने बंगाली समाज और सिस्टम को जोरदार तमाचा…

मल गया उछल , सन गया सत्ता का मलमल

  महकमा  बन गया है एक गुरुत्वहीन पाख़ाना , जहाँ मल हवा में उछल रहा है ,तैर रहा है, पंखों  से टकरा टकरा कर छिटक जाता है  , छत-दीवारों पर मॉडर्न आर्ट की तरह चिपक गया  है ।1।   गुरुत्वाकर्षण नहीं रहा अब , बस बड़े-बड़े गुरु बैठे हैं , फाइलों पर रख-रख कर मल,…