कैसे डूब गया दिनकर दक्षिण के दूर दिशांचाल में ?

जिन दिनकर को समस्त भारतवर्ष ने राष्ट्रवादी चेतना एवं वीर रस के प्रखरतम राष्ट्रकवि के रूप मे जाना, उन्हीं रामधारी सिंह को जीवन के अंतिम वर्षों में विरक्ति-सी हो गयी थी । उनका आखिरी समय बहुत अवसाद में कटा । मद्रास में बीती अपनी अंतिम संध्या पर दिनकर ने डायरी में लिखा- “सब कुछ पाकर…

मैं हूँ क्या? मैं क्या हूँ ? (कविता)

मैं हूँ क्या ? और मैं क्या हूँ ? क्या हैं एक ही प्रश्न के दो रूप, अथवा दो भिन्न दार्शनिक पहेलियाँ? तर्क-वितर्क की नूरा कुश्ती, हिन्दी भाषा की अकड़ या लचीलापन, केवल वाक्य विन्यास की बाल-सुलभ क्रीडा, या मस्तिष्क में लगा कोई परजीवी कीड़ा? अब क्या शब्दों के अनुक्रम पर भी संदेह करूँ? बेहतर…