छप्पन फाड़ के ऑक्सिजन ही ऑक्सिजन

देश के कोने-कोने में दिन-प्रतिदिन जितने ऑक्सिजन प्लांट बनाए जाने की घोषणा हो रही है , उसको देखकर लगता है भारत में एक दिन ऐसा भी आयेगा जब प्यार मांगोगे तो ऑक्सिजन मिलेगी, रोटी मांगोगे तो साथ में तरकारी की जगह  ऑक्सिजन और अगर गलती से किसी ने खीर मांग ली तो उसे जबरन ऑक्सिजन…

लॉकडाऊन में शादियाँ का महात्म्य

देश के कई शहरों में लॉकडाऊन लगा हुआ है । घर से निकलना, बाज़ार करना, व्यापार चलाना, भीड़ जमा करना – सब पर अंकुश है । फल-सब्जी-दूध भी समयानुसार मिल रहे हैं । रातों का कर्फ़्यू लागू है । ज़िंदगी और मौत में धागे भर का फरक बचा है । ऐसे में आज मोहल्ले मे…

अब बंद करो लॉकडाउन का प्रपंच (एक कविता)

ये चल क्या रहा है ? जब मन हुआ लॉकडाउन, जब सिर फिरा तो “कम डाउन- -टु ऑफिस, रिपोर्ट इज़ अरजेंट”, कभी गुरु, कभी शुक्र, कभी शनि-रवि-सोम, मन किया पहुंचे ऑफिस, नहीं तो वर्क फ्रम होम, मंगल और बुध पर कोरोना की दशा भारी, हनुमान, गणेश की महिमा है न्यारी, खुद की बर्बादी की है…

पैदल ही पलायन- जलेबी में उलझे या मकड़जाल में फसे ?

संभ्रांत रसोइयों में आजकल जलेबियाँ तक तली जा रही हैं । यही जलेबियाँ खुल-खुलाकर सड़कों पर रेंग रहे गरीब प्रवासी मजदूरों को उनके गावों-कस्बों का मार्ग दिखा देती हैं । संभ्रांत वर्ग जितना ठूस-ठूस कर खा रहा है , उसे पचा पाना उसके लिए पेचीदा समस्या है । जिनके अपार्टमेंटों के अंदर या छतों पर…

Peter May’s LOCKDOWN-Turned Down in 2005,Published Overnight in 2020

Finally published in 2020, Peter May’s Lockdown comes across as a journalistic account of the goings-on of the present day London. The rest of the world can correlate with the description of London under Lockdown. But written and submitted in 2005, the novel’s manuscript was turned down by publishers for being too unrealistic (and perhaps…

लॉकडाउन में मुझे चाहिए फ्रेश धनिया , गर्म कचोरी और खट्टे-मीठे आम

  सिंगापूर वाला सखा मुंह पर मास्क चिपकाए चार-पाँच किराना स्टोर छान आया है । घर पर पकौड़े बन रहे  हैं । बिना धनिये की चटनी के पकौड़ों का मज़ा अधूरा है । जिह्वा के तुष्टीकरण की खातिर एक हिंदुस्तानी कुछ भी करेगा । साथ में चाहे टमाटर की फ्रेश चटनी हो या पेक्ड केचप…

The LOCKDOWN – Sundry,Simplistic Views

  Lockdown could have been postponed had the Government of India held protracted negotiations with the virus and bought some valuable time. (A Liberal, always dumb)   Not only is there no need for a Lockdown, its promulgation would in fact kill the economy. (A Conservative, ever hawkish & greedy)   Lockdown is a pause,…

In Search of Lost Life in the Middle of the LOCKDOWN

I woke up with a start. This is just a matter of habit. I had no idea how long had I slept. I did not even retain the awareness of the room I was sleeping inside. Space and time have lost if not their whole meaning, then at least all importance. No one can go…

बी लाइक रॉबिंसन क्रूसो, अवॉइड बीइंग दुर्योधन

  भीषण एग्जिसटेंशियल क्राइसिस का समय है । अगर अल्बर्ट कामू और सांर्त्रे इस युग में जीवित होते तो पंफ्लेट पर पंफ्लेट छाप रहे होते । चीन से निकली महामारी मौत बनकर समूची मानवता के सिर पर नाच रही है । हम अपने ही घरों में स्वेच्छा से नज़रबंद हैं ! जनता कर्फ़्यू और लॉकडाऊन…