लव जिहाद को लिब्रांडों का परोक्ष संरक्षण क्यूँ?

जब शाहरुख ने दिल्लीवालों पर पिस्तौल तानी था तब रवीश पाणे ने उसे अनुराग मिश्रा जा बताया था । शांतिदूत के बचाव के साथ-साथ ब्राह्मण को गाली – डबल इनाम पाइस होगा रवीश्वा ! शाहरुख दुमका में बड़ा कांड कर दीस,  लेकिन चेहरे पर शिकन तक नहीं । इंडिया टुडे के मामुओं ने उसे अभिषेक…

साहेब के चार शेर

अब तक ये चार शेर गांधीवादी थे । थोड़े दबे-सहमे हुए, झुके-झुके से- शीतल और सौम्य । गुर्राना तो दूर, जनता की मांग पर कभी-कभी मिमिया भी देते थे । ऐसा नहीं है कि उनकी आक्रामकता पूर्णतया मिट गयी थी- घुसलखाने और शयन कक्ष में उनके ब्रह्मचर्य प्रयोग अनवरत चला करते थे । पर जनता…

My Experiments with Brahmcharya – An Exercise in Narcissism

Not everyone slept with the Great Soul with their express consent. The wife of his nephew was told to go near him and help out with his experiments. She was sixteen, recently married and disinclined to take off her clothes in the company of the revered septuagenarian. She was nudged to oblige on the pretext…

The Worldview of Naseeruddin Shah- Us Vs. Them is all that He Espouses

Naseeruddin rants and raves for a good half hour against Hindu bigotry and the Right-wing hatred, then softly concedes that neither he, nor anyone in his family, has personally been harmed or hurt in any way by the so-called Hindu bigots in any manner. This is a telling confession- clearly then, his worldview where ‘Islam…

Reflections on the Misplaced Outrage of the Islamic Fiefdoms

By looking towards the Middle East and the West to issue reprimands to India over religious matters, and expressing unabashed glee after these bastions of Abrahamic faiths registered official protests, many have proved the correctness and importance of Savarkar’s Punyabhumi test of Bhartiyata. Since ‘punyabhumi’ of these people is not India, even if their karmabhumi…

उदासी का राजकुमार या जली-कटी का होलसेल विक्रेता

कल एक बूढ़ी लाश के अंतिम संस्कार में सम्मिलित हुआ । पोस्ट-कोरोना युग में अब मौत इत्यादि पर अधिक नाटक-नौटंकी नहीं होता । विदाई समारोहों की आदत सी पड़ गयी है । फिर यह जाने वाला तो अपने पीछे अधिक नौहागर भी नहीं छोड़ गया । ऐसे में उठावने से लेकर शवदाह तक कई मर्तबा…

No Genius, Indian Nationhood is not like the failed European Experiment!

A revisionist autodidact has gone bonkers. He is going around the world reinterpreting Indian history, culture, philosophy, constitution and the country’s lived and imagined reality. He can be dismissed as an irrelevant blabber-mouth, and it is true that neither he, nor his stunted intellect hold any credibility anywhere, especially in the India of 2022. But…

कौन है वह निरा मूर्ख जो भारत को एक राष्ट्र नहीं मानता ?

अणुभाष अपने करों में संभालते ही यह चिरयुवा नायक स्वनामधान्य विद्वान हो जाता है । संवाद करते-करते कभी सनातन पर प्रवचन देने लगता है, तो कभी संविधान का भाष्य बताने लगता है । कभी तो विद्रोही स्वरूप धरकर जनक्रांति की चेतावनी देने लगता है, तो कभी शब्दानुशासन भंग करके उनकी नयी व्याख्याएँ करने लगता है…

Ask PERARIVALAN if he feels Sorry?   (Poem)

Kill the leader of a nation, Go to jail, Spend two lifetimes inside prison, Never give up the quest for your own freedom, Get freed, eventually. Come back home to a hero’s welcome, You killed an unsuspecting man after all, Who did not have any inkling that death was approaching, But that was his problem,…

मैं चिल्लाया ‘सईद अनवर’ (कविता)

सड़क पर चलते-चलते, सौहार्द पर मनन करते,  यकायक मेरा पाँव गया मुड़, मैं ज़ोर से चिल्लाया, सईद अनवर, स ई ई द अन वर र र र….. लोगों ने आव देखा न ताव, ज़मीन पर लेट गए सोचकर, कि अब होगा धमाका, क्या पता बरसें गोलियां, कुछ नहीं हुआ तो भी उन्हें डर ने घेरे…

An Innocuous Question in the Age of Wokism

I was walking inside a park, when I ran into an old acquaintance. She was walking her baby in a pram. They live in Montreal, and were in Kota to attend a family function. We exchanged pleasantries and made casual small talk.  The baby, hardly a year old, screamed for attention. “ We’re just moving,…

तुष्टिकरण, तेरे कितने नाम ?

दस-बारह करोड़ का घपला कोई धरतीफाड़ कांड नहीं होता । इतने में तो कुत्ते के गले का पट्टा या काले कौवे की फेन्सी ड्रेस वाली पोशाक भी नहीं आते । जो तुम्हें लगता हो आते हैं तो खरीद कर पहन लो । क्या गलत  कहा है दिल्ली उच्च न्यायालय ने ? पेट्रोल इतना महंगा हो…