धिम्मी करे बलवाई की रंगाई, बाकी को पढ़ाये कानून

बीती रात शहर में जमकर बलवा हुआ, आज सुबह से सेकुलरवाद की मीठी बयार चल रही है ।2।   गयी रात उनके हाथों में हथियार थे, आज ज़ुबान पर गांधी और देश का संविधान है ।4। कल पूछ रहे थे किसकी है यह दुकान? बहुत इतरा कर जता रहे थे -किसी के बाप का नहीं…

फोकट का आउटरेज़, फ्री-फंड का एक्टिविज़्म

भर फोकट का आऊटरेज़ एसी में बैठे-बैठे, ये फ्री-फंड का एक्टिविज़्म कॉफी पीते-पीते, ट्विटर करते-करते लग जाना लड़ने-झगड़ने, बात कहते-कहते लगना जन-सबोधन करने,   सेंटीमेंटल होकर कभी-कभी गरजने-बरसने लगना, प्रायः हर मुद्दे पर ही बागी राय रखना, “सरेआम लटका दो फांसी पर ! ऐलान करना सोफ़े पर चढ़कर, कब फिसलेगी गाड़ी इनकी?   कब होगा…

THEY ARE SCARED WITH YOUR CHOICE TO WRITE

Peddling narratives is their sole right.They are scaredWith your choice to write.(3) Nevertheless, you ought to try.Keep sending manuscripts,let them deny. (6) Fill pages, burn midnight oil.Speak, write, revealon what makes your blood boil. (9) Broadcast you views.Even if they get censored,they end up making news. (12) What is wheat to you, are to them…

घुटने टिकाये सर झुकाये पुलिस अच्छी नहीं लगती

घुटने टिकाये,सर झुकाये, पुलिस अच्छी नहीं लगती, वास्तविक होती हुई भी, यह तस्वीर सच्ची नहीं लगती ।4।   जो भीड़ से माफी मांग रहे, उनपर खाकी नहीं फबती, तोड़फोड़ के तमाशबीनों पर, वर्दी एकदम नहीं जँचती ।8।   इतना ही भर गए हो ग्लानि से, तो छोड़ो डंडा ,उठाओ कमंडल, क्षमाक्षील औ’ क्षमाप्रार्थी, खोल दो…

The LOCKDOWN – Sundry,Simplistic Views

  Lockdown could have been postponed had the Government of India held protracted negotiations with the virus and bought some valuable time. (A Liberal, always dumb)   Not only is there no need for a Lockdown, its promulgation would in fact kill the economy. (A Conservative, ever hawkish & greedy)   Lockdown is a pause,…

Dhimmi , Dhimmi EVERYWHERE

Dhimmi, Dhimmi everywhere, Not a drop of Dharma. Only Rent-seekers, pole climbers, Withered away all Karma ? (4) Surrounded by an ocean wide of wilful ignorance, Ever willing to surrender, Explore the scope for compromise on matters of civilization, Apologetic , guilt-ridden, Always unsure, ever unwise. (11) A millennium of servitude has killed and buried…

माई नेम इज़ शाहरुख अनुराग मिश्रा & आई एम ए टिक टॉक आर्टिस्ट

खुद का पाणे छिपा लिया रवीश कुमार ने , पर शाहरुख के अनुराग पर नहीं रुका  । ‘बामन , कुत्ता , हाथी, नहीं जात के साथी’  वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए इस भूमिहार – ब्राह्मण ने जिस तरह मिश्रा-मिश्रा का भौंपू अपने ‘प्राइम टाइम’ प्रोपेगेंडा पर बजाया , उससे इस बात का जवाब अंततः…

THREE  CHEERS  FOR LEGENDARY HINDU TOLERANCE

  Two minor shooting incidents have occurred in Delhi in the past one week .These are being touted as examples of rising Hindu terrorism ; aided and abetted by the so-called Hindu Majoritarian Nazi Government . Islamo-Bolsheviks  are desperately trying to draw parallels between those want to break India into pieces , and these ineffectual…

NO COMMUNAL VETO –NOT NOW & NEVER AGAIN

The slogans of Azadi are back. Jinnah must be recounting his Fourteen Points again in his grave. Parliament recently enacted Citizenship (Amendment) Act to provide a path to Indian citizenship for those members of Hindu, Sikh, Jain, Buddhist, Parsee and Christian religious minorities who had fled prosecution in three neighbouring Islamic Republics ( Afghanistan, Pakistan…

चलो ! शाहीन बाग़ चलते हैं

    कड़कड़ाती ठंड पड़ रही है आज, चलो ! शाहीन बाग़ चलते हैं, गरमा-गरम बिरयानी बंट रही होगी, थोड़ी जम कर चाँप देंगे, पाँच सौ का गांधी मिल जाए टॉप-अप में, तो आज़ादी-आज़ादी भी जाप लेंगे, गुस्से में तमतमाती कुछ सूरतें टाप लेंगे, भौंपू में भुनभुनाती धमकियाँ भाँप लेंगे, डर-सर्दी के डबल असर से…

पर्चा तो भर : कन्हैया बनाम केजरीवाल,और उसमे कपिल मिश्रा का छौंका

  कर्कश और कसैले कंठों का देशव्यापी कंपीटीशन हो जाए तो कन्हैया और केजरी में ख़िताबी भिड़ंत होगी । आखिर पीएम से कम ये दोनों किसी और को लानतें देते नहीं और उन्हे हिटलर से कम कुछ कहते नहीं  (हालांकि अब गृहमंत्री ने आधी ट्रोलिंग अपनी ओर खेञ्च ली है) । अपनी गर्दन और टांगें…

हिन्दू वोटर से इतनी नफरत क्यूँ ? : LEFT’S SCHADENFREUDE

    तुम समझो उनके द्वारा शासक को हिटलर कहने का अर्थ, वो पूछ रहे हैं नाजी (क्या हो ?) तुमसे , वोट किया क्यूँ व्यर्थ ? वो चीख-चीख कर बोल रहे हैं तुम हो बकरी-भेड़, मंदिर की चाहत में बोया है तानाशाही का पेड़ ।4।   समझ-बूझ कर (लेफ्ट की) उम्मीदों पर किया है…