आम नेताजी का भाषण (व्यंग्य धन फोकट चेक)

“किसी ने पूछा कि जी आप कह रहे हो कि दिल्ली में जनरेटर की दुकानें बंद हो गईं, तो क्या वो दुकानदार बेरोजगार हो गए ? क्या वो झक मार रहे हैं ? मैंने बताया नहीं जनाब वो आजकल सपने खरीद रहे हैं, और झूठ बेच रहे हैं । बढ़िया धंधा है ! अपने-अपने शहरों…

उसके बाप की दिल्ली थोड़ी है

ये कौन चला है ठोकने हस्पतालों पर ताले? उसे बताओ दिल्ली उसके बाप की थोड़ी है।2।   आए लोधी-तुगलक,कई गांधी बने फन्नेखाँ, कौन है ये रेजरी?वह किस चौपड़ की कौड़ी है? (4)   इठला रहा है कभी सीईओ,कभी प्रोप्राइटर बनकर, औकात मियां की मेयर से ज्यादा कहाँ छोड़ी है ? (6)   मायाजाल मुफ्तखोरी का…

पर्चा तो भर : कन्हैया बनाम केजरीवाल,और उसमे कपिल मिश्रा का छौंका

  कर्कश और कसैले कंठों का देशव्यापी कंपीटीशन हो जाए तो कन्हैया और केजरी में ख़िताबी भिड़ंत होगी । आखिर पीएम से कम ये दोनों किसी और को लानतें देते नहीं और उन्हे हिटलर से कम कुछ कहते नहीं  (हालांकि अब गृहमंत्री ने आधी ट्रोलिंग अपनी ओर खेञ्च ली है) । अपनी गर्दन और टांगें…