The True Horrors of the Partition & the False Narratives in Vogue

Partition, in itself, was not a tragedy, rather the only viable solution to the communal problem that infested the subcontinent. Jinnah should not be blamed for insisting on partition, rather should be hailed for his farsightedness in realizing that democracy in Asia would not quite function as it did in the US and the UK,…

My Experiments with Brahmcharya – An Exercise in Narcissism

Not everyone slept with the Great Soul with their express consent. The wife of his nephew was told to go near him and help out with his experiments. She was sixteen, recently married and disinclined to take off her clothes in the company of the revered septuagenarian. She was nudged to oblige on the pretext…

इतिहास के ताले-तहख़ानों को खुलने दो

ताले टूटते हैं, तहखाने खुलते हैं, सर्वे होते हैं, विडियोग्राफी होती है, न्यायालयों में साक्ष्य प्रस्तुत किये जाते हैं, वाद- विवाद होता है तभी तो इतिहास करवट लेता है, भगवान जागते हैं और शताब्दियों पूर्व हुए अन्याय का हिसाब- किताब होता है । बंद ताला या तहखाना किसी साध का अंत नहीं हो सकता ।…

भाषाई फुलझड़ी : धुलेलकर की हिंदुस्तानी के नाम पर संविधान सभा में धमाचौकड़ी

संबिधान सभा की दूसरी बैठक, तिथि 10 दिसंबर, 1946 सेक्षंस एवं कमेटी के मसले पर सदन में गरमागरम बहस चल रही थी । एक तरफ थे कृपलानी तथा जयकर, दूसरी तरफ लामबंद थे सुरेश चन्द्र बनर्जी , श्यामप्रसाद मुखर्जी, टंडन, केएम मुंशी और हरनाम सिंह । पंडित नेहरू कृपलानी को संघर्ष विराम का इशारा करके…

कैसे डूब गया दिनकर दक्षिण के दूर दिशांचाल में ?

जिन दिनकर को समस्त भारतवर्ष ने राष्ट्रवादी चेतना एवं वीर रस के प्रखरतम राष्ट्रकवि के रूप मे जाना, उन्हीं रामधारी सिंह को जीवन के अंतिम वर्षों में विरक्ति-सी हो गयी थी । उनका आखिरी समय बहुत अवसाद में कटा । मद्रास में बीती अपनी अंतिम संध्या पर दिनकर ने डायरी में लिखा- “सब कुछ पाकर…

जलियाँवाला और खू-कोरियाँ की रेंग- रेंग : एक टिप्पणी

एक नस्ल का दूजी संग, यह मानवीय व्यवहार नहीं था, जो घटा था अमृतसर में उस दिन, वह बस गोलीकांड नहीं था, वह बस हत्याकांड नहीं था । वह भारतीयों के प्रति अंग्रेजों की नफरत से उपजा नरसंघार था । वह भारतीयों के दिलों में बसी ग़ुलामी, कुंठा और उदासीनता का इज़हार भी था ।…

Vijaya Lakshmi Pandit in Conversation with Three World Leaders

Besides being the daughter of Motilal Nehru and younger sister of Jawaharlal Nehru, Vijaya Lakshmi Pandit was among the most influential diplomats of independent India. She was sent as India’s first Ambassador to the USSR(1947-49). After that she represented the country in the US and Mexico between 1949 and 1951. She was elected the first…