सड़कें हर काम के लिए हैं (कविता)

जाम करने के लिए हैं,                                  (चक्काजाम) जाम-से-जाम करने के लिए हैं,                            (शराब) दुआ-सलाम करने के लिए हैं, नित्य काम करने के लिए हैं,                            (पाख़ाना)     माहौल बने तो शाही हमाम करने के लिए हैं,                (स्नान) नाटक सरेआम करने के लिए हैं,                           (नुक्कड़ नाटक) चुनावी ऐलान करने के लिए हैं,                            (सभाएं) सारे कायदे हराम करने के…

क्या था बाबर और उसके बाप का ख्वाब-ए-हिंदुस्तान ?

Hotstar पर हालिया रिलीज़ हुई The Empire में बाबर को अपने वालिद मिर्ज़ा उमर शेख के ख्वाब-ए-हिंदुस्तान को बहुत शिद्दत से लेते हुए दिखाया गया है । मिर्ज़ा उमर निहायती कमजोर शासक था – उसे नर्म दिल कहकर बेइज़्ज़त किया गया है । फ़रगना उससे संभलता नहीं था, समरकन्द जीतना उसकी हैसियत से बाहर था…

तूफ़ान – सामाजिक समरसता के नाम पर फिर वही घिसापिटा लव जिहाद फॉर्मूला

तूफान के पटकथा लेखक अंजुम राजबली के पास बहुत अनुभव है – पुकार, अपहरण, राजनीति, ग़ुलाम, कच्चे धागे, लेजेंड ऑफ भगत सिंह और अन्य बड़ी फिल्मों में काम किया है । इस अनुभव का इस्तेमाल उन्होने तूफान की पटकथा को बड़ी चालाकी से लिखने में किया है । बिना किसी कारण या आवश्यकता के कहानी…

अकबर के संतों से मिलने के नहीं हैं प्रमाण

किस्से-कहानियों का अकबर सर्वव्यापी है । बहुतेरे साधु-संतों के संग अकबर की मुलाकातों की किंवदंतियाँ प्रचलित हैं । बीरबल के किस्सों के हिसाब से अकबर सवालों, पहेलियों और गप्पों का भी बादशाह था । सत्यान्वेषी अकबर दीवान-ए-खास में बैठकर विभिन्न धर्माचार्यों के साथ धर्मचर्चाएँ किया करता था । बर्बर बाबर और कठमुल्ले औरंगजेब जैसे धार्मांध…

डंडे को प्रणाम है, डंडा ही समाधान है (कविता)

(डंडे से अभिप्राय दंड/punishment/कानूनी दंड से भी है और हाथ में पकड़े जाने वाले डंडे से भी) जो बैठ कर के सड़कों पर जो चीख-चीख गलियों में स्वतंत्रता का दंभ भर अभिव्यक्ति के नाम पर चरा रहे हैं बुज्जियाँ उड़ा रहे हैं धज्जियां कानून की, समाज की प्रधान की, विधान की शासन के सम्मान की…

धार्मिक कौवे बनाम पादरी (कविता)

एक कौवे को लगा बताने, पादरी उसकी लाचारी का हाल, तू हाँ कर दे,बना दूँ कोयल, हो जाओ सब मालामाल, रखा क्या है धर्म में तेरे, वही जाति- जी का जंजाल,   कांव-कांव कर मचा दिया इतने में कौवे ने कोलाहल ।4।   दूर दराज से उड़ते-उड़ते आ पहुंची पूरी जमात- “जान अकेला तुम क्या…

धिम्मी करे बलवाई की रंगाई, बाकी को पढ़ाये कानून

बीती रात शहर में जमकर बलवा हुआ, आज सुबह से सेकुलरवाद की मीठी बयार चल रही है ।2।   गयी रात उनके हाथों में हथियार थे, आज ज़ुबान पर गांधी और देश का संविधान है ।4। कल पूछ रहे थे किसकी है यह दुकान? बहुत इतरा कर जता रहे थे -किसी के बाप का नहीं…

THEY ARE SCARED WITH YOUR CHOICE TO WRITE

Peddling narratives is their sole right.They are scaredWith your choice to write.(3) Nevertheless, you ought to try.Keep sending manuscripts,let them deny. (6) Fill pages, burn midnight oil.Speak, write, revealon what makes your blood boil. (9) Broadcast you views.Even if they get censored,they end up making news. (12) What is wheat to you, are to them…

फेसबुक पोस्ट का जवाब पोस्ट से दे

फेसबुक पोस्ट का जवाब या तो पोस्ट से दे, या जा के कर एफ़आईआर, न हिंदुस्तान तेरा बाप का है, न ये हँसता-खेलता शहर, न पोलिस स्टेशन तेरे मामू का है, न किसी नागरिक का घर, थोड़ा सुनना सीख,   कभी तेरी भी सुनेंगे, ये पोलिस-प्रशासन-अदालतें, थोड़ा सब्र कर, ज़रा इंतज़ार तो कर ! (11)…

दीवार पर टांग लो यह धमकीभरा ट्वीट (कविता)

फ्रेम करा इस ट्वीट को, लो दीवार पर टांग, खुल्लमखुल्ला धमकी है ये, मत समझो मुर्गे की बांग ।4। बैठे मौके की ताक में, हैं आस्तीन के साँप, है अंतहीन यह युद्ध, कभी भूल न जाएँ आप ।8। जाएँ अदालत भाड़ में, बस चलेगी इनकी बात, इंतज़ार उस दिन का है,                            ( ये ट्वीट करने…

मैं हूँ झण्डा, मैं ही सिपाही (कविता)

मैं हूँ झण्डा,मैं ही सिपाही,भगवा लहू,भगवा स्याही । 4। अब भय न तेरे डंडे का,इस रामविरोधी अजेंडे का,जो मन में आए पूरी कर,तू भगवा-विरोधी कार्यवाही ! (8) जब-जब ये अस्थियाँ चटकेंगी, जय जय श्रीराम ही गरजेंगी, बहते हुआ शोणित में भी, उबाल पैदा कर देंगी ।12। जब कभी तू थक जाएगा, अगर किसी दिन रुक…