कलकत्ता की आखिरी शाम (कविता)

(लिखी अगस्त की उस शाम जिसकी अगली सुबह भोपाल निकलना था) भीगी-भीगी फुहारें गिरती-रुकती पुकारें भूले-बिसरे दिन इस शहर के जो अब छूट रहा है । ठंडी-ठंडी मानसूनी हवा चीरती मेरे हृदय को दस्तक देती स्मरण कराती उस रिश्ते को जो अब टूट रहा है । हल्की बारिश में क्या गीला, क्या सूखा छत पर…

दीप भर नहीं हूँ (कविता)

दीप भर नहीं हूँ केवल ज्योत हूँ मैं धर्म की प्रकाश में ही निहित मेरे सनातन का मर्म भी   (4) प्रज्ज्वलित हूँ आदि से   मैं पूर्वजों की संपदा प्रयास कर न बुझा सका मुझे कोई भी आक्रांता (8) अपनी ही धरा पर युगों से संघर्षरत   कोटि-कोटि आहुतियों से जीवन ये सिंचित रहा…

मैं फोड़ूँ तो चलता है (कविता)

खबरदार रोका जो मुझे,पटाखे फोड़ता गर दिख जाऊँ,जीता है मेरा पाकिस्तान,कमबख्त दिवाली थोड़ी है, काफ़िर लाख दें जलालतें,दो दलीलें मेरे वकील बन तुम,था करवा चौथ भी तो,पड़ोसी शौहर से कम थोड़ी है, कोई न टोके, पूछे न कुछ,लोकशाही को जिंदा रखना,तीस बरस में आया मौका,दिवाली तो हर बरस है मनना, तुम छोड़ो हो धुआँ-धुआँ,मैं करूँ…

सड़कें हर काम के लिए हैं (कविता)

जाम करने के लिए हैं,                                  (चक्काजाम) जाम-से-जाम करने के लिए हैं,                            (शराब) दुआ-सलाम करने के लिए हैं, नित्य काम करने के लिए हैं,                            (पाख़ाना)     माहौल बने तो शाही हमाम करने के लिए हैं,                (स्नान) नाटक सरेआम करने के लिए हैं,                           (नुक्कड़ नाटक) चुनावी ऐलान करने के लिए हैं,                            (सभाएं) सारे कायदे हराम करने के…

मंत्री का पिल्लू भाग गया (कविता)

चौकन्नों को चटनी चटाकर चूतियों को चकमा देकर   मुस्तैदों की माश चोशकर कर बंदोबस्त का बैंड बजाकर कानून व्यवस्था को धता बताकर पुलिस महकमे को गॉड दिखाकर भाग गया भई भाग गया मंत्री का पिल्लु भाग गया     (8) मुन्ना भैया कर कारस्तानी समन की करके नाफरमानी चंपत हो गया, बड़ा हरामी क्या उठा ले…

इमरान, आपने घबराना नहीं है (कविता)

बीते हफ्ते तालिबान खान का दिल भर आया संयुक्त राष्ट्र में प्री-रेकॉर्डएड स्पीच चलवाया अमरीका को निरा-कृतघ्न राष्ट्र बतलाया पाकिस्तान को वार ऑन टेरर का विक्टिम दिखाया पश्चिम पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया कश्मीर के लिए इमरान को बहुत रोना आया भारत को फासीवाद की गिरफ्त में बताया देखो ,मोदी ने बातचीत को आगे…

भोजताल (कविता)

संध्या हो गई, उसे तो होना ही था सारी दीप्ति को तुझमें खोना ही था तेरे किनारे जो हम निकल आए टहलने मंद पवन में कामनाओं को मचलना ही था जाते जाते सब रंग गए बिखर जिधर भी देखूं तेरा प्रकाश फैला उधर लहरों को बहना है ऐसे ही रात भर मत्त बादल भटकेंगे कभी…

शांत, अधीर (कविता)

प्रकाश से गहरा पाटभावनाओं सी शंकित झीलमेहंदी जैसा चढ़ा मौसमआसमां अधीरहवा, तरंगें नदारदसोई शायद मछलियाँ भीउबल उबल जाएभीतर एक ज्वालामुखीये सन्नाटा, ये शांतितब तक हीजब तक प्रेम जीवित हैफिर सिर्फ त्रासदी (12) ———————————————————————————————————————————– #hindipoem #kavita#bhopal#bhojtal #MP

पिता का घर (कविता)

डेढ़ साल बाद खुला पिता के घर का ताला, बंद पड़ा था, सामान और स्मृतियों को सहेजे हुए, हम बंदी थे दो हज़ार मील दूर हालातों के कारावास में, जीवन चल तो रहा था, किराए के मकान में दिन काट रहे थे, नौकरी में व्यस्त एवं कोरोना से बचकर, अक्सर सोचते थे पिताजी के चित्र…

डंडे को प्रणाम है, डंडा ही समाधान है (कविता)

(डंडे से अभिप्राय दंड/punishment/कानूनी दंड से भी है और हाथ में पकड़े जाने वाले डंडे से भी) जो बैठ कर के सड़कों पर जो चीख-चीख गलियों में स्वतंत्रता का दंभ भर अभिव्यक्ति के नाम पर चरा रहे हैं बुज्जियाँ उड़ा रहे हैं धज्जियां कानून की, समाज की प्रधान की, विधान की शासन के सम्मान की…

ये संकरा रास्ता (कविता)

कहीं से कहीं ले जाताये संकरा रास्ताटहला कर फिर वहीं ले आताये संकरा रास्ताकिसी महल केकिसी हरम मेंकौन सी पटरानी केकिसी किस नौकरानी केराज़ छिपाता कभी बतलाताये संकरा रास्ता (10) —————————– दिनभर सोता रात जागताराजा साहब की राह ताकताआहट लेता आहें सुनताखुसफुस करता बातें बुनतासमय संग किलकारी भरतानवागंतुक का अभिनंदन करताकोई कक्ष जब क्रंदन करतामंगल…