Nation OR A Union of States – No Country for the Deluded Genius!

“India is merely a geographical expression,” Winston Churchill once said in exasperation. “It is no more a single country than the Equator.” The founder of Singapore, Lee Kuan Yew, also once echoed that sentiment, arguing that “India is not a real country. Instead it is thirty-two separate nations that happen to be arrayed along the…

Ask PERARIVALAN if he feels Sorry?   (Poem)

Kill the leader of a nation, Go to jail, Spend two lifetimes inside prison, Never give up the quest for your own freedom, Get freed, eventually. Come back home to a hero’s welcome, You killed an unsuspecting man after all, Who did not have any inkling that death was approaching, But that was his problem,…

आम नेताजी का भाषण (व्यंग्य धन फोकट चेक)

“किसी ने पूछा कि जी आप कह रहे हो कि दिल्ली में जनरेटर की दुकानें बंद हो गईं, तो क्या वो दुकानदार बेरोजगार हो गए ? क्या वो झक मार रहे हैं ? मैंने बताया नहीं जनाब वो आजकल सपने खरीद रहे हैं, और झूठ बेच रहे हैं । बढ़िया धंधा है ! अपने-अपने शहरों…

इतिहास के ताले-तहख़ानों को खुलने दो

ताले टूटते हैं, तहखाने खुलते हैं, सर्वे होते हैं, विडियोग्राफी होती है, न्यायालयों में साक्ष्य प्रस्तुत किये जाते हैं, वाद- विवाद होता है तभी तो इतिहास करवट लेता है, भगवान जागते हैं और शताब्दियों पूर्व हुए अन्याय का हिसाब- किताब होता है । बंद ताला या तहखाना किसी साध का अंत नहीं हो सकता ।…

तेरह साल बाद बाइज्ज़त बरी  – पुलिस को लताड़, निचली अदालत पर चुप्पी

अभी हाल ही में अनुसूचित जनजाति का एक युवक 13 बरस का कारावास काटकर भोपाल जेल से रिहा हुआ । उच्च न्यायालय ने उस पर लगे हत्या के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया । माननीय न्यायालय ने तीखे स्वर में पुलिस की भर्त्सना की और समूची जांच को मनघड़न्त, गैर-जिम्मेदार और विद्वेषपूर्ण पाया…

चीन, चौथी वेव और आता हुआ लॉकडाउन? (खरीखोटी)

का गुरु? चौथी वेव कब बुला रहे ? अरे आयेगा, आयेगा । धीरज रखिए । बताकर नहीं न आयेगा । अपने टाइम पर आयेगा । चीन को देख रहे हैं ना । हालत खराब है मतलब, एकदम खराब । औ’ जब कोरोना चीन का, जिसने उसे जन्म दिया, पीछा नहीं छोड़ रहा है, तो हमारा…

भाषाई फुलझड़ी : धुलेलकर की हिंदुस्तानी के नाम पर संविधान सभा में धमाचौकड़ी

संबिधान सभा की दूसरी बैठक, तिथि 10 दिसंबर, 1946 सेक्षंस एवं कमेटी के मसले पर सदन में गरमागरम बहस चल रही थी । एक तरफ थे कृपलानी तथा जयकर, दूसरी तरफ लामबंद थे सुरेश चन्द्र बनर्जी , श्यामप्रसाद मुखर्जी, टंडन, केएम मुंशी और हरनाम सिंह । पंडित नेहरू कृपलानी को संघर्ष विराम का इशारा करके…

उसकी यात्रा और इसका भ्रमण (व्यंग्य)

नहीं साहब, किसी मित्र के विवाह में सम्मिलित होना कोई अपराध नहीं है, न हो सकता है । विवाह किसी का भी हो, मंगलमय अवसर है । और जो स्वयं वैवाहिक बंधन में जकड़े जाने को प्रस्तुत है, उसपर वामपंथी, लिब्रांडु अथवा वोक जैसे ठप्पे भी नहीं लगाए जा सकते ।  वह कैसा वामी-कोमी जो…

जुबां हिन्दी हो या केसरी – अजय देवगुण को फर्क नहीं पड़ता

सुदीप किच्चा ने भाषाओं के बारे में कुछ ज्ञान बांटा । क्या कहा, ये किसी को ठीक से पता नहीं है । केजीएफ़ 2 चलने के अहंकार में कुछ कह गया होगा । ज़बान केसरी अंकल को तो एकदम पता नहीं था जब उसने पलटट्वीट किया जहां उसने हिन्दी को ‘हमारी’ मातृभाषा और राष्ट्रभाषा करार…