The FALL of ROY- An Obituary for Andrew Symonds (Poem)

( I wrote this poem in 2009. Pup had refused to stand-by Symo, and the latter was sent home by the Australian team management. His career seemed to be as good as over.) Warnie’e era was over, the Pigeon had flown, The explosive Gilly retired, giant Haydos gone, Suckers took over the Cricket Down Under,…

An Ode to the Blonde Conjuror of Leather-ball Tricks (For Warnie!)

Records drew the contours, Charisma filled-in colours, Bamboozled by his craft, Magic was lent by charm. (4) The promise of ball in flight, Realized in dip or drift, Beautifully it then ripped, The woodwork lay shattered. (8) Crunch brought out his best, The Showman came alive, He always had one more trick, Forever carried that…

God Bowls a Googly, Warne Plays for Leg Break (Obituary)

Shane Warne was never about innocence, he was always the romance of cricket. He did not play the sport like boys do, he was always an adult playing mind-games. He did not approach cricket like a game of chance or glorious uncertainties, he plied his trade by luring, teasing, testing, trapping and outfoxing the opponents….

ए कोल्ली, रण कब बनाएगो? टिप्स लेगो के? ( क्रिकेट बकैती)

इंग्लैंड से एक टेस्ट छोडकर भाग आए, आईपीएल पूरा होग्या, विश्वकप में पाकिस्तान से पिट लिए, दीवाली निकल गयी, कोच बदल गया, आधी कप्तानी छिन गई, आराम की खातिर एक टेस्ट छोड़ दिया- इतना कुछ हो लिया पर विराट कोल्ली, तुझसे रन कोणी बन रे । थारा बल्ला नू जो साँप सूंग कर गियो छो,…

पाकिस्तानी क्रिकेटरों की साफ़गोई का कायल होता जा रहा हूँ (व्यंग्य)

विश्व कप में बारह बार हारने के बाद पाकिस्तान को अंततः भारत पर जीत नसीब हुई । छियान्वे से हरे वकार युनूस के घावों पर अब जाकर कुछ मलहम लगा । कसम से जडेजा ने तब इसे बड़ा कस के कूटा था ।  तीस साल बाद मिली इस दुर्लभ खुशी में भी वकार को सबसे…

मैं फोड़ूँ तो चलता है (कविता)

खबरदार रोका जो मुझे,पटाखे फोड़ता गर दिख जाऊँ,जीता है मेरा पाकिस्तान,कमबख्त दिवाली थोड़ी है, काफ़िर लाख दें जलालतें,दो दलीलें मेरे वकील बन तुम,था करवा चौथ भी तो,पड़ोसी शौहर से कम थोड़ी है, कोई न टोके, पूछे न कुछ,लोकशाही को जिंदा रखना,तीस बरस में आया मौका,दिवाली तो हर बरस है मनना, तुम छोड़ो हो धुआँ-धुआँ,मैं करूँ…

कुफ़्र-काफिर पर ऐतराज नहीं, झांट-झंटुए और *टुए पर है ? (निबंध)

परसों तक सब्र ही तोड़ते थे, कल कुफ़्र भी तोड़ दिया । सब्र का क्या है साहब । हम लोग काफिर हैं, बारह सौ साल से बुतशिकनों की नफरत खत्म होने का इंतज़ार कर रहे हैं । कश्मीर में आज भी हमारे लोग मारे जा रहे हैं । शर्म बस हमें आती नहीं । क्रिकेट…