अमरीका जाकर मेरा देसी दोस्त हुआ गन-क्रेजी (फकैती)

ओवैसी भारत में था तो कुत्ते, गुड़ियाँ और बर्तन इकट्ठे किया करता था. अब अमरीका पहुँचकर बंदूकें जमा करने में लगा है . सब मिट्टी और आबोहवा का असर है. वैसे ओवैसी हम उसे कहते भर हैं, काफ़िर होने के नाते जिहाद से उसका कोई सरोकार नहीं है . यानि कोई टेरर अटेक की प्लानिंग नहीं हो रही है . घर-घर खेलने वाला लड़का अब काऊबोय्ज़ बनाम रेड इंडियंस खेलना चाहता है . डॉगहाउस, डॉलहाउस और बर्तन भंडार बनाने वाला सुकुमार अपने घर में शस्त्रागार खड़ा रहा है.

हालिया उसने 9 mm बोर की स्मिथ और वेसन पिस्तौल खरीदी है. इससे पहले उसने एक टॉरस TX-२२ खरीदी थी . “यह देखो मेरी दूसरी गन,”, दंभी दुर्योधन के अंदाज़ में अट्टाहास करता हुआ वह गरजा, “बढ़िया बींधती है, टार्गेट फट ही जाता है” . साफ है, इसके अन्दर का योद्धा अब रुकने वाला नहीं है, मुंह खून लग चुका है .

“किसी को उड़ाना थोड़ी है ब्रो”, मैंने उसे याद दिलाया तो तुनककर जवाब दिया कि शादी करते समय पार्टनर का चुनाव यही मानकर किया जाता है कि वह आपको प्रेम में सराबोर कर देगा. बंदूक खरीदी गयी है तो चलना उसकी नियति है .चले तो जमकर चले, आधे अधूरे मन से नहीं-यही उत्तम नीति है . ऐसा कहकर ओवैसी तान-चढ़े घोड़े की तरह हिनहिनाया . ठीक उसी समय मुझे उसमे यमराज के भैंसे के दर्शन भी हुए. मौत का वाहन मोक्ष रथ कहलाता है. हमारा कल्लू मामा बंगाली बदहज़मी से बाहर निकलकर अब अमरीकी ड्रीम में  मोक्ष रथ बनकर डकार ले रहा था.

 “भारत में थे तो तुमने अवांछित परिणामों से बचने हेतु अपने प्यारे कुकुर ज़ोयी का पुंसत्व-हरण करवा दिया था . इन बंदूकों के बोर भी भरवा कर ही रखो घर में, भंते.” हमें सलाह पेश करने की भीषण चुल्ल है . “बंदूकें प्रजनन नहीं करतीं दोस्त, संहार करने पर आमादा रहती हैं . ज़ोयी के टट्टे उसकी गर्मी शांत करने के उद्देश्य से फुड़वाये गए थे. बन्दूक को तो हमेशा लालायित मोड में रखना चाहिए . रेड इंडियंस भले न हों पर रियल एंड फेक ब्लडी इंडियंस आर हेर, देर, एव्रीव्हेर इन स्टेट्स. बहुत बेईज्ज़ती करवाते हैं, यार,” उसने जवाब दिया. बहुत खतरनाक रूप में सामने आया था ओवैसी . सीता-हरण की पूर्व-संध्या पर रावण. चांसलर बनने से ठीक पहले का हिटलर . सीनेट में एक्सिस ऑफ़ ईविल भाषण पढता जूनियर बुश ‘दुब्या’.

बुश का नाम चला तो डिक चेनी का स्मरण हो आया . जंगल में शिकार करते- करते महाराज ने अपने मित्र को ठोक डाला था . “किसी मित्र को रेंच या शूटिंग रेंज पर साथ न ले जाना बे . किसी को ठुकना ही है तो वह कोई अनजान ही हो”, मैंने डेस्परेशन में कहा . “वी लिव इन स्टेट्स, डूड . कभी भी, कहीं भी, किसी के भी द्वारा शूट कर दिए जाने के लिए हम मानसिक रूप से तैयार  रहते हैं . जैसे भारतीय LOC और LOAC पर पाकी-चीनी घुसपैठों के लिए, और व्हाट्सएप पर तुम्हारे द्वारा वांछनीय व्यवहार की लक्ष्मण रेखा के उल्लंघन के लिए!”, ओवैसी आर्ग्यूड कन्विन्सिंग्ली.

“शिकार करूँगा. अपनी गुड़ियों को बींधूंगा . निशानेबाज़ी करूँगा . बर्तन छेद डालूँगा. कोई ऐरा-गैरा नत्थू गैरा मेरी प्राइवेट प्रॉपर्टी पर चला आया तो आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ सकती है . माय गन्स डिफाइन मी एज ए पर्सन नाओ. They are the true extensions and proper expressions of my multi-faceted personality.” वाकई बहुत खतरनाक रूप में सामने आया है ओवैसी. आने वाली जंग के लिए असला- बारूद इकठ्ठा कर रहा है,  और मरने –मारने को तैयार बैठा है .


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