चीन, चौथी वेव और आता हुआ लॉकडाउन? (खरीखोटी)

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का गुरु? चौथी वेव कब बुला रहे ?

अरे आयेगा, आयेगा । धीरज रखिए । बताकर नहीं न आयेगा । अपने टाइम पर आयेगा । चीन को देख रहे हैं ना । हालत खराब है मतलब, एकदम खराब । औ’ जब कोरोना चीन का, जिसने उसे जन्म दिया, पीछा नहीं छोड़ रहा है, तो हमारा काहे छोड़ देगा ।

मतलब आएगा इसपर पर कोई शक नहीं है, कब आएगा कह नहीं सकते?

बिल थोड़ी है बिजली का, तलाक का नोटिस है ज़िंदगी से । मुचूअली हो गए सेपरेट तो ठीकै है, वरना चूसेगा खून । मौत कभी क्या बता के आती है?

तब मास्क काहे नहीं लगा रखे हो बे?

मास्क लगाएँ हमारे दुश्मन । हम मास्क नहीं लगाएंगे । मौत आने से पहले भय खाकर मर जाएँ ? ग़ुलाम हैं, जो चेहरा ढक कर घूमें ? हिजाब पहन लें, चाहते हो? साला सांस नहीं आता, बोल नहीं पाते, पसीना चूता है नाक से और मुंह में गिरता है । ठुकवाए तो हैं दो ठो वेकसिन, कुछ तो करता होगा वो भी । औ कुछ नहीं भी करता है तो हमने मन बना लिया है गुरु कि लगवाया है वेक्सीन, इसलिए अब मास्क तो नहीं लगाएंगे । इससे बड़ा चुत्यपा हमें दूसरा कोई नहीं लगता ।

और माहौल जो है गड़बड़ाने लगा, तब ?

तब की तब देखेंगे गुरु । तिल-तिल कर हर दिन मत मरो, तिलमिलाओ भले पर जीवित रहो । जबहो कर देगा अनिभार्य, याने कमपुलसरी, हमओ उहि दिन मास्क लगाने की सोचेंगे । जहां चल सकेगा पौवा चलाएँगे, पुलिस वाला सामने आ गया तो फट से लगा लेंगे । लेकिन उ सब केवल फ़ाइन के डर से, मौत से कोई डर नहीं क्यूंकी उसके बाद तो सारे अकाउंट्स क्लोस्डे है ।

लॉकडाउन लगेगा?

सव्वाल ही पैदा नहीं होता । गोर्मेंट कान्ट अफोर्ड । अर्थव्यवस्था बैठ जाएगी । कभी उबरै नहीं पाएगी । पचास साल पीछे चले जाएंगे । लंका से बदतर हालात होंगे । चौबीस में चुनाव है , इकोनोमी ठीक रखना होगा । लॉकडाउन नहीं लगेगा, नहीं लगेगा, नहीं लगेगा, लिख लो, नोट कल्लो । और जो लग जाये, तो भी पब्लिक मानेगी नहीं गुरु, क्रांति हो जाएगी । अभी भारत में लॉकडाउन का युग समाप्त ।

लाशें गिरने लगेंगी तब क्या करेंगे ?

वो ज़िंदा शरीर हैं जो गिरा करते हैं, लाशें न गिरती हैं न मरती हैं । लोग काम करेंगे, तो पैसा बनेगा, आदमी खाएगा-पिएगा, तब न ज़िंदा रहेगा । कैसे लगा देंगे लॉकडाउन यार, मज़ाक है क्या ? नंगा खाएगा क्या, औंकेगा क्या और हगेगा क्या?

तब क्या कोविड मज़ाक है ? आज चीन के पैंतालीस शहरों में तालाबंदी है । वैश्विक सप्लाय चेन बाधित हो रही हैं । आयात- निर्यात सब पर भरी असर है । डेढ़ महीना हो गया । क्या क्षिंपिंग मज़ाक कर रहा है ?

अरे चीन ने तो दुनिया के साथ मज़ाक किया ही न । कहकर किया साला ।  अब थोड़ा उसके साथ भी हो रहा है तो भुगतेगा। और याद रखिए, चीन का नुकसान में भी लाभ है । जो कच्चा माल चीन आयात करता है उसका भाव घट रहा है । जो भी बना-बनूकर वह निर्यात करता है उनकी कीमतें बढ़ रही हैं । पूरी दुनिया को फटका लगेगा, चीन लेकिन लाभ लेगा । सब जगह मंदी आएगी, चीन तेज़ी पकड़ेगा ।  लॉकडाउन लगा दे, घर पर ही बैठा दे – जब हर हाल में जीत ही है, तो बाज़ीगर मजदूरी क्यूँ करे ?

पर हम क्या करेंगे ? अभी लोग बूस्टर लगवा नहीं रहे !

बूस्टर भी लगेगा, डबल बूस्टर भी, शायद ट्रिपल और ऐसे अनगिनत वेक्सीन लगें । लोग अभी नहीं लगवा रहे, फोर्थ वेव को दस्तक देने दो, लोग जुगाड़-पानी लगवा कर डोज़ लगवाएंगे । जब तक भीड़ नहीं टूट पड़ती दुकान पर, मारा-मारी नहीं होती, हिंदुस्तान में दुकान की वेल्यू नहीं बढ़ती । अब चाहे घोड़े का मूत्र हो या कुकुरमुत्ते का ज्यूस, हमारी किस्मत में यही वेक्सीन लिखा है, लगवाना तो झक मार कर पड़ेगा ।

वैसे चीन का वेक्सीनेशन प्रोग्राम बहुत प्रभावी नहीं रहा है । कड़क लॉकडाउन से वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचेगा और गरीबी बढ़ेगी । आम लोग दिक्कत में हैं । फिर भी चीनपरस्त चिरकुट अपने मालिक के खिलाफ चूँ तक नहीं करते ? भारत सरकार के विरोध में कितना जहर उगला था ।

क्या है कि चीन अपने पालतू जानवरों का पूरा ध्यान रखता है । गोरे तो फिर भी थोड़ी गैरत रखते हैं, सो वहाँ के चीनी पिट्ठू नाममात्र के लिए क्षिंजियांग, तिब्बत, हाँग काँग की बात कर लेते हैं , मानवाधिकार का मुद्दा उठा देते हैं । पर हम भूरे लोग तो गजबे प्रेक्टिकल हैं । क्या भारत, क्या पाकिस्तान-लंका-नेपाल और क्या सऊदी- हमारे यहाँ के चीनी एसेट्स तो न सिर्फ उनका राग अलापते हैं और खुल्लमखुल्ला उनके राजनयिकों और एजेंटों से मिलते-जुलते हैं बल्कि हर मुद्दे पर भारत को नीचा दिखने की कोशिशों में भी शामिल रहते हैं । भारत ने हर मायने में चीन से बेहतर कोविड प्रबंधन किया है, पर हमें केवल खराब प्रेस ही मिलती है जबकि चीन को बेनीफिट ऑफ डाउट दे दिया जाता है । इसी को ‘पैसा फेंक तमाशा देख’ कहते हैं । दूसरी तरह से इसे ‘नाच मेरी बुलबुल पैसा मिलेगा’ भी कह सकते हैं ।   

और स्मरण रहे – जिस दिन से ट्रम्प की ट्विटर से विदाई हुई, उसी दिन से दुनिया में ‘चाइना वाइरस’ लिखने-बोलने वाला कोई नहीं बचा । न चीनी पेरोल पर चढ़े दलालों की हिम्मत है, न ही चीन से चिढ़ने वालों की। हम लेकिन खुलकर कहते हैं – चीनी वाइरस की चौथी वेव आएगी ज़रूर, लोग भी मरेंगे, फिर भी भारत में  लॉकडाउन नहीं लगेगा । साथ ही साथ, चीन द्वारा ठेली गयी आर्थिक मंदी भी आने वाली है ।  बाकी सब हम झेल लेंगे लेकिन ये कमबख़्त मास्क हमसे दूर रखो, बूस्टर भी नहीं लगवाऊंगा और सेनीटाइज़र की बोतल अगर कहीं दिख गयी तो फोड़ कर अमुक में डाल दूंगा ।

और कोई सवाल ?

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