
https://anchor.fm/abpunch/episodes/ep-e1gut85
“अरे छोटू, का पिराबलम है इन जेंटलमेन का ?
महिला दिखी नहीं, मोर बनकर नाचने लगा ससुरा!”
“सरूर का फोकस देखिये, मतलब एकदम टोटल !”
“ज़िंदगी तो एक यही आदमी जी रहा है, बाकी तो बस धकिया रहे हैं।”
“ही इज़ ए चिक मेगनेट”
ऐसी दोयमदर्जे की फूहड़ बातें करने वाले मूर्ख! पिराबलम उस जेंटलमेन का नहीं है, तेरा है । तेरी कुंठा तुझे कस के पकड़ कर बैठाये हुए है गर्त में । जहां से उड़ना तो दूर, उसके वजन से तू ठीक से खड़ा तक नहीं हो सकता । ये जो तू आव देखे न ताव थसी सरूर के महिलाओं संग बात करते, मुसकुराते फोटो और विडियो शेयर करके अपने हिसाब से मौज लिया करता है न, इस पर तुझे शर्म आनी चाहिए !
पर आएगी नहीं,
क्यूंकी एक तो वह तब आती है जब आपका ज़मीर ज़िंदा हो ।
और दूसरे, शर्म का भाव स्त्रीलिंग है । और स्त्री तुम्हारे जैसे लंपटों से कोसों दूर ही रहती हैं, क्यूंकी तुम्हारी चिरकुटाई भलीप्रकार जानती हैं । यू आर आल अबाउट ब्रेग एंड शेयर, बट ज़ीरो ऑन केयर ।
लड़का-लड़की एक दूजे को देखकर मुस्कुरा-भर दिये तो तुम्हें चक्कर चल रिया दीखता है । हाथ पकड़ लिए या मिला भी लिए तो कुंठाधिपति तुम्हें काहे करंट लगता है ? आँखें उचका कर हेपिली एवर आफ्टर बोल पड़ते हो । कोई हग-वग कर्रए तो तुमको संस्कृति का ह्रास जान पड़ता है । औ’ नर – मादा अकेले में बात क्या करते दीख गए घोषणा कर देते हो कि अब प्रजनन होकर ही रहेगा ! “गुरु, लगता है, हो गवा” – इस कथन में ही तुम्हारी सोच का दायरा बंधा है ।
और कितना गिरोगे बे ? धरातल से नीच्चे का पाताल में धस कर ही मानोगे?
उन इज्ज़तदार महिलाओं के बारे में कभी सोचिए जिनको इस जेंटलमेन के मज़े लेने के चक्कर में तुम फंटर लोग बदनाम कर देते हो । अरे ये सब की सब संभ्रांत परिवारों से आने वाली महिलाएँ हैं । तुमको क्या लगता है कि व्हाट्सप पर भेजें है तो बस तुम और जिन चिर्गुट्टों को फारवर्ड किए रहे, उनका ये निजी हसी-ठिठोली चल रहा है? अबे मूर्खानंद, तुम इन मेसेजों को वाइरल भी तो कर रहो । किस लिए इतने ब्याकुल हो? क्या साबित करने पर तुले हो? कि सरूर ठरकी है, केसेनोवा है? पर उसने छिपाया ही कब है?
आप कह रहे हो – मेन भिल भी मेन । (men will be men)
हओ, एकदम सही ! एंड भिमेन? इट सीम्स एस पर यू, भिमेन आर हॉर्स ! (as per you, women are whores)
माने, मेन भी ए हॉर्स, भिमेन भी हॉर्स । (man be a horse, women be whores)
इट इस हॉर्स बिज़नेस भेनेवर दे टॉक । (it is horse business whenever they talk)
ये तो बहुत कुंठापूर्ण सोच है तुम्हारी । स्वस्थ मित्रवत भाव की दिशा में बढ़ ही नहीं सकती । मानव-मानव में सरल संवाद क्या तुम्हें संभव ही नहीं जान पड़ता । क्या हर संबंध केवल मोल-भाव पर आधारित है?
और फिर अगर कहीं कुछ पक भी रहा है, तो तुम्हें क्या चुल्ल है ब्रो ? कन्सेटिंग एडल्ट्स, यो ?
ये कैसी अजब तिलमिलाहट लिए घूमता है भारत का पुरुष ।
मैंने युवा नहीं लिखा, क्यूंकी सुरूर साहब की शरारतों पर अधेड़ों की निगाहें ज्यादा चढ़ती है ।
वैसे तो रंगिनीयत का वक्त हमेशा रहता है और कभी जाता नहीं, पर जिनहोने थक-हार कर हथियार डाल दिये दिये हैं, उन्हें ज्यादा शिकायतें है । जो अभी भवसागर में गोते लगा रहे हैं, और जिन्हें मोती मिलने की उम्मीद बरकरार हैं, वे सरूर साहब के कारनामों से प्रेरणा लेते हैं और बढ़ा-चढ़ा कर तारीफ भी करते हैं । अय्याशियों में लिप्त कुछ खिलाड़ी सरूर के नाम पर खुद को जस्टिफाय भी कर देते हैं । अधिकतर लोग जानते हैं कि उनमें न इतना करिश्मा है, न इतनी हिम्मत । ऐसी जनता अंगुलियों को दांतों तले दाबकर, फिर उन्हें मोबाइल स्क्रीन पर हिलाकर फूहड़ मेसेज और फोटो फॉरवर्ड किया करती है । तारीफ भी करनी पड़ती है, आदमी है तो फनकार ही, पर कहीं न कहीं उस बढ़ाई में एक किस्म की टीस है, जलन का भाव है और बहुत ज्यादा लीचड़पना छिपा हुआ है ।
कुल-मिलाकर इतना उत्साहित होने वाली बात है नहीं, कि आप इन फोटो इत्यादि पर टीका-टिप्पणी-छींटाकशी करके वक्त ज़ाया करें । आप इससे बेहतर हो सकते हैं । किसी महिला पर ही नहीं, बेचारे पुरुष पर भी कीचड़ उछालते हुए हमें संवेदनशीलता बरतनी चाहिए । का है कि आदमी लोग सूसाइड ज्यादा करते हैं । सार्वजनिक चाहे निजी जीवन में कोई किसी से भी बात करे, निष्कर्ष निकालने मत दौड़ पड़िए । कुछ पक भी रहा है तो पकने दीजिये, गॉसिप करना चमन-चूतियों का काम है । और जो बहुत लालायित हों स्वयं भी विपरीत लिंग वालों से अंतरंग संवाद स्थापित करने हेतु,,तो थोड़ा गूदा दिखाओ, ऐसे हिल-हिला के , डुल-डुला के, खी-खी करने से चाँद झोली में आकर नहीं गिरेगा । ससम्मान आगे बढ़ कर, तनिक बुद्धि लगा के, आत्मविश्वास के साथ दू ढंग का शब्द गिराइएगा, तब न कोई आपको पलट कर प्यारभरी मुस्कान और सीधा जवाब देगा । तब सियार और कुकुर आपके भी मेसेज फॉरवर्ड कर दिया करेंगे । तब उनको भी यही पाठ पढ़ाया जाएगा ।
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