घोषणापत्र-21 (कविता)

जिस प्याले पर नाम लिखा हो मेरा,

वह प्याला मुझको प्रत्येक मिले;

अमृत-गरल जो भी हो प्राप्य मेरा,

उतना भर मुझको अवश्य मिले ।4।

जिस छाले को पलना ही हो मुझपर,

वह टिके नहीं लंबा, जल्दी आकर निकले;

लड़ना पड़े दुनिया से भी लड़ लेंगे,

पर एक बार उससे भी आँख लड़े।8।

तेरे दर्शन हों न हो सकें लेकिन,

अब से तू मानस में सदैव रहे;  

कुछ और न चाहे कर सकूँ इस वर्ष,

मेरी कलम बस पन्नों पर दौड़ चले।12।


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