तेरा हलवा तुझे मुबारक -एक मूर्खतापूर्ण कविता

अब हमारे हलवा खाने पर भी ऐतराज है ,
सुना है हलवे के अरबी होने पर नाज़ है ,
जो उसने पूछा क्या यह हलवा हलाल है ?
माफ कीजिये आपसे पूछा इसका मलाल है ,
मेरे जेहन में पर एक सवाल है ,
कि ऐसा भी क्या बवाल है ,
कि न खाते हो न खाने देते हो ,
जब देखो बस यार ताने देते हो ,
नाचीज़ हलवे पर जब यह हाल है ,
तो हराम प्यार का खयाल है ।
तो हराम प्यार का खयाल है ॥

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