आज वोट है शहर में

 

 

आज वोट है शहर में ,

है बंधा हुआ किसी खूँटे से हर बकरा ,

कोई पैसे लेकर मोल बिका है ,

कोई सरेंडर किया है भाँप कर खतरा ।1।

 

जात-धर्म की रस्सी उसकी खींच रही गर्दन,

बिजली-सड़क-पानी को अभी थमा नहीं क्रंदन ,

आज चाहे हरियाली में बंधा हुआ है बकरा लाचार ,

नियति में है हलाल ही ,बस मन जाने दो ये त्योहार ।2।

 

शहर में वोट है तो मतदाता से है मनुहार,

बस आज ही खुला है लोकतन्त्र का हाट-बाज़ार,

नेतागण की ईद –दिवाली होगी मतगणना के दिन ,

कैसे मने यह तमाशा आम आदमी के वोट दिये बिन ।3।

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  1. Aakash Deep says:

    Nice, aaj ki hakikat bechara matdata

    Like

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