भक्त का रक्त था बह निकला (कविता)

 

भक्त का रक्त था बह निकला

आँसू तो न निकले आह निकली

प्रभु नहीं मिलेंगे इल्म हुआ  (इस बार सरकार नहीं बनेगी)

जनता ये बहुत जालिम निकली

 

देशभक्ति का तोड़ किसान हुआ

वो कहता है लागत न निकली

डेव्लपमेंट की काट बेरोजगार हुआ

निराशा है वेकेंसी नहीं निकली

 

सवर्णों को संख्या का गुमान हुआ (तथाकथित)

नोटा की धमकी नहीं थोथी निकली

गा-गा रटने का नुकसान हुआ

आवारा बन खेतों में चर निकली

 

क्या बंध गए हैं अश्वमेध के घोड़े

क्या फिर यज्ञ का अवसान हुआ

सत्ता मे कोई न स्थिर हुआ

हर एक केवल मेहमान हुआ

स्थिर तो जनमानस भी नहीं

जो वादा करे वही भगवान हुआ

ये वादे पूरे कभी होते नहीं

कौन खेती करके धनवान हुआ ?  (20)

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