भगत सिंह से दूर रहो (एक कविता)

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नाम भी मत लो भगत सिंह का,

रह गया होता वह वीर जवान ,

तो ठोक के ठप्पा लाल रंग का ,

मांग लेते उससे भी प्रमाण  ।1। (देशभक्ति का )

वामपंथ के नाम पर देते,

जी भर-भर कर रोज़ ही गाली, ,

एंकाउंटर में टपका देते,

बतलाकर उसको बागी-नक्सली,

वह इंकलाबी नौजवान था,

करता बात किसानों की था ,

दूर मजहबी पचड़ों से रहकर,

संवादरत मजदूरों से था।2। 


वह मार्क्स-लेनिन को पढ़ने वाला,

सीने में सुलगाये था ज्वाला,

दूर हटो, मत नाम लो उसका ,
न था भगवाधारी, न खद्दरवाला ।3। 

जेल में मिलने पहुंचे थे जवाहर,

भगत भगत हो लौटे थे ,

होगा दोस्त इरविन तो उनका ,

फांसी रुकवाने की सोचे थे ? (4)

क्या विनय नहीं था हुआ गवारा ?,
राजनैतिक पूंजी बर्बाद नहीं की,

गांधी-नेहरू की राह अलग थी,

नेताओं ने छवि खराब नहीं की,

था सौंडर्स को मारनेवाला,

कोई बेरिस्टर, गांधीवादी नहीं था,
एसेम्बली में बम था फेका,
शांति का सिपहसालार नहीं था।5।

गांधी से क्यूँ नहीं था बन पड़ा ,

न करते फिर इरविन से समझौता,

यह कैसा अहम था बापू का ?

ये कैसा हठ सत्यान्वेषी का ?

अपील की, दलील दी,
जलील हुए, जले भी,
पर नहीं हुआ कि अंग्रेजों को धमका आते,
नहीं हुआ की वार्ता करने आगे लंदन न जाते?
तभी दिखाये जनता ने थे

जननेता को काले झंडे,
सफ़ेद आत्मा पर आज भी पुते हैं,

क्रांतिवीरों के खून के धब्बे । 6 ।


#भगतसिंह

#bhagatsingh #gandhiirvin

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  1. sportsbook says:

    Why viewers still make use of to read news papers when in this technological world everything is presented on web?

    Like

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